
ब्यरो रिपोर्ट

वासुदेव चतुर्थी (Vasudeva Chaturthi) के दिन गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा-पाठ करने से साधक को जीवन में सफलता मिलती है और उसके कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं। इस दिन को श्रद्धाभाव से मनाना शुभ माना जाता है।


वासुदेव चतुर्थी का शुभ मुहूर्त इस वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 21 मार्च को रात 11 बजकर 56 मिनट पर शुरू हो रहा है। यह तिथि 22 मार्च की रात 9 बजकर 16 मिनट तक जारी रहेगी।

विशेष रूप से, चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11 बजकर 15 मिनट से दोपहर 1 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। वहीं वर्जित चन्द्रदर्शन का समय रात 8 बजकर 15 मिनट से रात 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में चंद्रमा का दर्शन वर्जित है।

पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा, सिंदूर, लाल फूल, जनेऊ और सुपारी अर्पित करें। इसके साथ ही भोग में मोदक, केले, मौसमी फल, बेसन के लड्डू और मीठा पूरन पोली रखा जा सकता है।

साधक को व्रत का संकल्प लेने के बाद सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर पूजा का आरंभ करना चाहिए। विधिपूर्वक की गई पूजा से गणेश जी की कृपा बनी रहती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां भी हैं। इस दिन तुलसी का पत्ता गणेश जी को अर्पित न करें। पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी और गणेश जी ने एक-दूसरे को श्राप दिया था।

इसके अलावा, व्रती को काले कपड़े पहनकर पूजा नहीं करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काला रंग नकारात्मकता से जुड़ा होता है। इसी तरह चंद्रमा के दर्शन से भी बचना चाहिए।
अंततः, व्रती को किसी से झगड़ा, वाद-विवाद या अपमान से भी बचना चाहिए। ऐसा करने पर व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। विधिपूर्वक पूजा और सही आचरण से ही वासुदेव चतुर्थी का लाभ प्राप्त होता है।

