एलपीजी संकट और तेल संकट के चलते सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया

एलपीजी संकट और तेल संकट के चलते सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया

ब्यरो रिपोर्ट

एलपीजी संकट और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते देश में तेल संकट गहराने की आशंका के बीच सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है। इसका उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है।

सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है। इसके तहत पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से जुड़े सभी उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, आयात-निर्यात, मार्केटिंग और उपभोग की जानकारी साझा करना कंपनियों के लिए अनिवार्य हो गया है।

तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) को इस अधिनियम के तहत सूचनाएं इकट्ठा, संकलन और विश्लेषण करने वाली एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। इससे आपात स्थिति में मंत्रालय को योजना बनाने में मदद मिलेगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुझाता शर्मा ने बताया कि अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी किसी भी आदेश का उल्लंघन अपराध माना जाएगा और इसके उल्लंघन पर जेल की सजा भी हो सकती है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम क्या है?
यह कानून सरकार को यह अधिकार देता है कि वह नागरिकों को उचित कीमत पर जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करे। साथ ही जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी पैदा होने से रोके। इसे खाद्य सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की स्थिर आपूर्ति बनाए रखने में मददगार माना जाता है।

धारा 3 के तहत केंद्र सरकार आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। वह स्टॉक सीमा तय कर सकती है, व्यापार को विनियमित कर सकती है और जमाखोरी पर रोक लगा सकती है। धारा 5 के तहत ये शक्तियां राज्य सरकारों को भी हस्तांतरित की जा सकती हैं।

भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए पश्चिम एशिया सहित लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस से प्राकृतिक गैस भी आयात की जाती है।

सरकार का यह कदम देश में तेल और गैस की सुरक्षा और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अधिनियम आपात स्थिति में कीमतों और वितरण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएगा।