रामनगर में जमीन आंदोलन: जनता का अल्टीमेटम सरकार के लिए

रामनगर में जमीन आंदोलन: जनता का अल्टीमेटम सरकार के लिए

स्थान : रामनगर
रिपोर्टर – सलीम अहमद साहिल

रामनगर के वन ग्रामों और राजस्व भूमि पर बसे लगभग 20 हजार लोग अब अपनी जमीन का मालिकाना हक पाने के लिए एकजुट हो गए हैं। वर्षों से वादों के सन्नाटे और सरकारी निष्क्रियता से परेशान जनता अब सीधे तौर पर सत्ता को जवाब देने के मूड में है।

इस आंदोलन के केंद्र में पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी हैं, जिन्होंने सरकार की विफलता को मुखर रूप से जनता के सामने रखा। नेगी का आरोप है कि रामनगर की जनता को केवल वोट बैंक के रूप में देखा जाता है और वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने में सरकार ने कोई पहल नहीं की।

संजय नेगी ने स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट के तीन कार्यकालों को “मौन कार्यकाल” करार दिया और सांसदों पर भी हमला बोला, जो चुनावों में वादे करते हैं, लेकिन दिल्ली पहुँचते ही वन ग्रामवासियों की सुध लेना भूल जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि मार्च तक यदि जनता को मालिकाना हक नहीं मिला तो तहसील परिसर में आमरण अनशन होगा।

इस आंदोलन को और मजबूती मिली जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पदयात्रा का नेतृत्व संभाला। रावत ने सरकार पर सीधे हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग दशकों से वन ग्राम, वन खत्तो और अन्य सरकारी भूमियों में बसे हैं, वे अतिक्रमणकारी नहीं बल्कि राज्य के असली भाग्यविधाता हैं।

रावत ने याद दिलाया कि 2016 में उनकी सरकार ने इन गरीबों को मालिकाना हक देने का संकल्प लिया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उस पर सियासी ताला जड़ दिया है। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े असली अतिक्रमणकारी वे हैं जो जनता की भावनाओं को कुचलकर जमीन बेच रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि जब तक रामनगर, मालधन, बिन्दुखत्ता और पूंछड़ी के निवासियों को कानूनी हक नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई अब केवल जमीन की नहीं बल्कि अस्मिता और स्वाभिमान की बन चुकी है, और विपक्ष ने सरकार को चारों तरफ से घेर लिया है।

फाइनल वीओ: रामनगर की ये हुंकार अब देहरादून और दिल्ली तक गूँज रही है। जनता का अल्टीमेटम स्पष्ट है—या तो मालिकाना हक दो, या फिर 2027 के चुनाव में सत्ता से बेदखली के लिए तैयार रहो। मार्च माह रामनगर के लिए निर्णायक साबित होने वाला है।