
ब्यरो रिपोर्ट

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान, इज़रायल तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। खासतौर पर Strait of Hormuz से तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण एलपीजी बाजार में हलचल बढ़ गई है।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्थिरता का असर भारत में भी एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की 100 प्रतिशत आपूर्ति बनाए रखने का दावा कर रही है।

सरकार ने गैस की अनावश्यक खपत रोकने के लिए 25 दिनों की इंटर-बुकिंग अवधि भी लागू की है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में हर परिवार को गैस के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए।

गैस बचाने का सबसे आसान तरीका प्रेशर कुकर का उपयोग है। दाल, चावल और सब्जियां कुकर में बनाने से न केवल खाना जल्दी पकता है बल्कि लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक गैस की बचत भी होती है।

खाना पकाने से पहले सभी तैयारियां कर लेना भी गैस बचाने का प्रभावी तरीका है। चूल्हा जलाने से पहले सब्जियां काट लें, मसाले और अन्य सामग्री तैयार रखें, ताकि गैस बेकार में न जले।
इसके अलावा हमेशा बर्तन को ढककर खाना पकाना चाहिए। ढक्कन लगाने से भाप अंदर ही रहती है और खाना जल्दी पकता है, जिससे गैस की खपत कम होती है।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि गैस के बर्नर और बर्तनों की नियमित सफाई की जाए। अगर लौ नीली की जगह पीली या संतरी दिखाई दे रही है तो यह संकेत है कि बर्नर साफ करने की जरूरत है।
साथ ही सही आंच और सही बर्तन का उपयोग भी जरूरी है। चौड़े और सपाट तले वाले बर्तन बेहतर गर्मी सोखते हैं। वहीं इंडक्शन कुकटॉप, राइस कुकर या इलेक्ट्रिक केतली जैसे बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल भी गैस की बचत में मददगार साबित हो सकता है।

