लोहाघाट में कांस्टेबल हेम महरा की ईमानदारी का उदाहरण, 34 हजार रुपये लौटाए

लोहाघाट में कांस्टेबल हेम महरा की ईमानदारी का उदाहरण, 34 हजार रुपये लौटाए

स्थान – लोहाघाट
ब्यूरो रिपोर्ट

ईमानदारी आज भी जिंदा है, इसका उदाहरण मंगलवार को लोहाघाट में देखने को मिला। सोमवार को बाराकोट के काकड़ निवासी गोपाल लोहाघाट बाजार में आए हुए थे। उनके पास 34 हजार रुपए की नकदी थी, जो बाजार में सड़क पर गिर गई। काफी खोजबीन के बाद भी पैसे नहीं मिल पाए, जिससे गोपाल और उनका परिवार काफी परेशान हो गया।

इस बीच, लोहाघाट थाने में तैनात यातायात कर्मी कांस्टेबल हेम महरा को यह रकम मिली। उन्होंने पैसे को संभाल कर सुरक्षित रखा और मालिक का पता लगाने में जुट गए। कई प्रयासों के बाद उन्हें गोपाल का पता चला। कांस्टेबल महरा ने फोन के माध्यम से गोपाल से संपर्क किया और अपनी रकम लेने के लिए कहा।

आज मंगलवार को गोपाल की बेटी सपना और पत्नी मंजू देवी लोहाघाट पहुंचे। कांस्टेबल हेम महरा ने उन्हें 34 हजार 40 रुपए की नकदी सुरक्षित रूप से सौंप दी। रकम पाकर मां-बेटी अत्यधिक प्रसन्न हुईं और उन्होंने कांस्टेबल महरा की ईमानदारी की सराहना की। उन्होंने चंपावत पुलिस को भी धन्यवाद दिया।

सपना और मंजू देवी ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं था कि उनके पैसे वापस मिलेंगे। उन्होंने कांस्टेबल महरा को इनाम देने की कोशिश की, लेकिन महरा ने हंसते हुए मना कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका इनाम उनकी रकम लौट जाने में ही मिल चुका है।

जानकारी के अनुसार, कांस्टेबल हेम महरा पहले भी कई लोगों का खोया हुआ सामान, नकदी और जेवर लौटाने में मदद कर चुके हैं। उनकी इस ईमानदारी के लिए स्थानीय जनता ने सराहना की है और उन्हें पुरस्कृत करने की मांग की जा रही है।

यह घटना दिखाती है कि ईमानदारी और जिम्मेदारी वाले अधिकारी आज भी जनता की सेवा में तत्पर हैं और समाज के लिए मिसाल कायम कर रहे हैं।