
स्थान : पौड़ी

ब्यूरो रिपोर्ट

विकासखंड खिर्सू के सुमाड़ी क्षेत्र में निर्माणाधीन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड का स्थायी परिसर शुक्रवार को भी ठप रहा। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही, पर्यावरण मानकों का पालन नहीं किया जा रहा और निर्माण में अनियमितताएँ हो रही हैं।


ग्रामीणों ने 1 मार्च से निर्माण कार्य रोक रखा है। शुक्रवार को सुमाड़ी, चमराड़ा, नयालगढ़ और खल्लू गांव के ग्रामीण युवा नेता सुधीर जोशी के नेतृत्व में कार्यस्थल पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि भूमि दान देने के बावजूद स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को काम दिया जा रहा है।

ग्रामीणों ने पर्यावरणीय चिंताओं को भी उठाया। उनका कहना है कि डंपिंग जोन से भविष्य में खेतों और कृषि भूमि को नुकसान पहुँच सकता है। इसके चलते स्थानीय लोग निर्माण कार्य के तुरंत सुधार की मांग कर रहे हैं।
सूचना मिलने पर तहसील प्रशासन और एनबीसीसी के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रही, और ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि एनआईटी उत्तराखंड एक महत्वाकांक्षी परियोजना है और इसकी समय पर प्रगति सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मांगों को लेकर एसडीएम और निर्माण कंपनी को निर्देश जारी किए गए हैं।

जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि जल्द ही ग्रामीणों के साथ वार्ता करके समाधान निकाला जाएगा और निर्माण कार्य को पुनः शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना में स्थानीय युवाओं की रोजगार में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
एनआईटी उत्तराखंड का उद्देश्य क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान करना है। साथ ही स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान करना और रोजगार अवसर बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
स्थानीय ग्रामीण और युवा नेता सुधीर जोशी ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो विरोध और तेज किया जाएगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि ग्रामीणों की आशाओं और पर्यावरण सुरक्षा का ध्यान रखते हुए परियोजना को पूरा किया जाए।

