
स्थान : उत्तरकाशी

ब्यूरो रिपोर्ट

महा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तरकाशी स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में 150 वर्ष पुरानी ‘दिवारा’ परंपरा का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष परंपरा में श्रद्धालु संतान प्राप्ति और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रातभर खड़े दीपक के साथ साधना करते हैं।


मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। मंदिर को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

मंदिर के पुजारी महंत जयेन्द्र पुरी ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन पांच प्रवेश द्वारों से भक्तों को धाम में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।


इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। महंत के अनुसार, महाशिवरात्रि पर बाबा दूल्हा स्वरूप में दर्शन देंगे, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

महाशिवरात्रि के प्रमुख आकर्षणों में बाबा विश्वनाथ का विवाह उत्सव विशेष रूप से मनाया जाएगा। यह विवाह समारोह पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न होगा।


विवाह उत्सव के उपलक्ष्य में भगवान शिव की भव्य झांकी पूरे शहर में निकाली जाएगी। इस शोभायात्रा में हजारों भक्त विभिन्न पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर शिवभक्ति का संदेश देंगे।
श्रद्धालुओं का मानना है कि ‘दिवारा’ परंपरा और महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर समिति ने भक्तों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

