
स्थान : डोईवाला
ब्यूरो रिपोर्ट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर डोईवाला और रानीपोखरी क्षेत्र में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।


सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू जनजागरण के साथ वैदिक सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश देना रहा। बड़ी संख्या में सनातनी समाज के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदू समाज को संगठित होने की आवश्यकता है।


समाज को अपनी जड़ों से जुड़ते हुए वैदिक सनातन परंपराओं और मूल्यों को समझना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों से परिचित रह सके।

वक्ताओं ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को बचपन से ही सनातन संस्कृति, परंपराओं और महापुरुषों के जीवन से परिचित कराया जाना चाहिए।

इससे उनमें संस्कारों का विकास होगा और समाज की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी।
सम्मेलन के दौरान कहा गया कि सभी सनातनियों को महापुरुषों के जीवन प्रसंगों को सुनना और समझना चाहिए। उनके आदर्शों और बताए गए मार्ग पर चलकर ही समाज को मजबूत और संगठित बनाया जा सकता है।
ऋषिकेश से पहुंचे संत सर्वात्मानंद महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से करनी होगी।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की ओर लौटना समय की आवश्यकता है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को आत्ममंथन करना चाहिए।
सर्वात्मानंद महाराज ने यह भी कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होना होगा।
जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक संस्कृति और मूल्यों की रक्षा संभव नहीं है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने वैदिक सनातन संस्कृति के संरक्षण और समाज को एकजुट रखने का संकल्प लिया।
सम्मेलन के माध्यम से हिंदू समाज में जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

