
स्थान – काशीपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

जनपद नैनीताल में घटित हृदयविदारक घटना ने आज उस समय नया मोड़ ले लिया, जब 40 वर्षीय सुखवंत सिंह का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। काशीपुर में हुई 4 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी के बाद न्याय की आस में दर-दर भटक रहे सुखवंत सिंह ने सिस्टम की बेरुखी और उधमसिंह नगर पुलिस के कथित मानसिक उत्पीड़न से आहत होकर आत्मघाती कदम उठाया था।


आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक लाइव के माध्यम से भ्रष्टाचार और पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। जब आज उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पूरे क्षेत्र में मातम छा गया। परिजनों की चीख-पुकार और शोकाकुल माहौल ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।


अंतिम संस्कार के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई कद्दावर नेताओं का जमावड़ा देखने को मिला। कांग्रेस और भाजपा के कई विधायक और पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और शोक संतप्त परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान लोगों में आक्रोश और संवेदना दोनों का माहौल बना रहा।

जसपुर विधायक आदेश चौहान ने इस मौके पर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में अब सरकार नहीं, बल्कि बेलगाम अधिकारी शासन चला रहे हैं। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों का जिक्र करते हुए व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया।

वहीं खटीमा विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने भी धामी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि आम आदमी को न्याय के लिए इस तरह दर-दर भटकना पड़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

अंतिम संस्कार से पहले किसानों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। हालात उस समय तक तनावपूर्ण बने रहे, जब तक प्रशासन ने परिजनों की प्रमुख मांगें मानते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ठोस आश्वासन नहीं दिया। इसके बाद ही अंतिम संस्कार किया जा सका।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण जरूर है, लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। एक ओर जहां सुखवंत सिंह की पत्नी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं, वहीं दूसरी ओर समाज में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है कि आखिर एक रक्षक कहलाने वाला विभाग किसी व्यक्ति को इस हद तक क्यों मजबूर कर देता है।
अब पूरे उत्तराखंड की निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि सुखवंत सिंह द्वारा फेसबुक लाइव में लगाए गए गंभीर आरोपों पर क्या कोई ठोस और कड़ा एक्शन लिया जाएगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल प्रदेश भर में सुखवंत सिंह के लिए न्याय की आवाज बुलंद होती जा रही है।

