पौड़ी स्थित नर्सिंग कालेज का नाम स्व. अंकिता भंडारी के नाम पर हुआ परिवर्तन, सीबीआई जांच के लिए विधिक प्रक्रिया शुरू

पौड़ी स्थित नर्सिंग कालेज का नाम स्व. अंकिता भंडारी के नाम पर हुआ परिवर्तन, सीबीआई जांच के लिए विधिक प्रक्रिया शुरू

लोकेशन – देहरादून

ब्यूरो रिपोर्ट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने पौड़ी स्थित राजकीय नर्सिंग कालेज डोभ (श्रीकोट) का नाम बदलकर अब स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कालेज डोभ (श्रीकोट), पौड़ी कर दिया है। इस संबंध में सचिव स्वास्थ्य डा. आर. राजेश कुमार ने आदेश जारी किया है।

मुख्यमंत्री ने पहले ही इस संवेदनशील मामले में संस्थान का नाम बदलने की घोषणा की थी और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

उन्होंने राजपुर रोड में आयोजित कार्यक्रम के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि इस प्रकरण से सबसे अधिक कष्ट अंकिता के माता-पिता को हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए हर मुद्दे पर विचार कर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।

उधर, शासन ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने के लिए विधिक परीक्षण भी शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा राजनीति करना उचित नहीं था।

उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में जिम्मेदारी का भाव होना चाहिए था, लेकिन आडियो वायरल होने के बाद राज्य में अस्थिरता फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि जिन्होंने ऐसा किया, उन्हें जनता देख रही है और ऐसे लोगों को प्रदेशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले में अन्य कानूनी पहलुओं पर भी विमर्श चल रहा है और सरकार अंकिता के माता-पिता की मांगों के अनुरूप जल्द ही निर्णय लेगी। उन्होंने जनता से भरोसा जताया कि राज्य सरकार पूरे मामले में निष्पक्ष और संवेदनशील रवैया अपना रही है।

स्व. अंकिता भंडारी के नाम पर नर्सिंग कालेज का नाम परिवर्तन इस बात का प्रतीक माना जा रहा है कि सरकार ने पीड़ित परिवार के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता दिखाते हुए उनकी भावनाओं को प्राथमिकता दी है।

साथ ही राजनीतिक दलों और समाज के सभी वर्गों से मुख्यमंत्री ने अपील की कि इस संवेदनशील मामले को लेकर किसी भी प्रकार की राजनीतिक हवा न बनाई जाए और स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखा जाए।

यह कदम न केवल शिक्षा संस्थान के लिए एक यादगार संकेत है, बल्कि प्रदेश में संवेदनशील मामलों में न्याय और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।