

स्थान : रुड़की
विशाल/अर्सलान अली

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रुड़की में दो अस्पतालों पर छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। टीम ने सुनहरा रोड स्थित कैलाश नर्सिंग होम और माँ जच्चा बच्चा हॉस्पिटल में गंभीर खामियां मिलने के बाद दोनों के ऑपरेशन थिएटर सील कर दिए। इसके बाद, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रामनगर स्थित मेट्रो सिटी हॉस्पिटल और मैक्स हेल्थ केयर का भी निरीक्षण किया और दोनों के ऑपरेशन थियेटर को सील कर दिया।



इस कार्रवाई का नेतृत्व एसीएमओ हरिद्वार डॉक्टर रमेश कुंवर ने किया। डॉक्टर कुंवर के अनुसार, लंबे समय से विभाग को शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अस्पताल बिना जरूरी दस्तावेजों और लाइसेंस के संचालन कर रहे हैं। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई।


डॉक्टर रमेश कुंवर ने कहा कि इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है और संचालकों को अस्पतालों के सभी दस्तावेजों के साथ हरिद्वार कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैध कागजात नहीं मिलते हैं, तो इन अस्पतालों पर पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


सूत्रों के अनुसार, कुछ अस्पताल बिना योग्य डॉक्टरों और डिग्री के संचालन कर रहे हैं, जो मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का पालन न करने वाले किसी भी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा, और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।


यह कार्रवाई काशीपुर में हुई एक बड़ी छापेमारी के बाद हुई है, जहां स्वास्थ्य विभाग ने कैलाश नर्सिंग होम में बिना योग्य डॉक्टरों के ऑपरेशन करने और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के आरोप में छापा मारा था। इस छापेमारी के बाद अस्पताल की बिल्डिंग सील कर दी गई थी और मरीजों को 108 एंबुलेंस से अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया था।


हालांकि, छापेमारी के बावजूद संचालकों ने नई बिल्डिंग बनाकर अस्पताल फिर से खोल लिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हाल ही में इस अस्पताल पर दोबारा जांच की और लापरवाही मिलने पर फिर से कार्रवाई की। इस पर सवाल उठते हैं कि जब स्वास्थ्य विभाग के कदमों के बावजूद अस्पताल संचालकों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुनः मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के लिए नए अस्पताल खोल रहे हैं, तो क्या स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ ठोस और दीर्घकालिक कार्रवाई करेगा? क्या ऐसे अस्पतालों को समय रहते पूरी तरह से बंद किया जाएगा, ताकि किसी की जान से फिर खिलवाड़ न हो?



स्वास्थ्य विभाग को इन सवालों के जवाब देने होंगे, और यह देखना होगा कि क्या यह केवल तात्कालिक कार्रवाई तक सीमित रहेगा, या विभाग ऐसी संस्थाओं के खिलाफ ठोस और प्रभावी कदम उठाएगा।


