

स्थान – हल्द्वानी
रिपोर्टर – ऋषि कपूर

हल्द्वानी में रेशम कीट पालन व्यवसाय तेजी से किसानों के लिए आय का साधन बनता जा रहा है। वर्तमान में शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 200 से अधिक किसान इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।



रेशम कीट से रेशम उत्पादन की प्रक्रिया पांच चरणों में पूरी की जाती है। पहले और दूसरे चरण में कीट की देखभाल रेशम विभाग द्वारा की जाती है, जबकि तीसरे चरण में कीट किसानों को सौंपा जाता है। इसके साथ ही विभाग किसानों को शहतूत के पौधे भी वितरित करता है। केंद्र और राज्य सरकार भी रेशम कीट पालन करने वाले किसानों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करती हैं।




हल्द्वानी में रेशम पालन करने वाले किसान अब सीधे मार्केट से जुड़े हैं। वे तैयार कोकून (रेशम) सीधे व्यापारियों को बेच रहे हैं, और इसकी गुणवत्ता के आधार पर सरकारी तय मूल्य से अधिक मूल्य भी प्राप्त कर रहे हैं। रेशम फेडरेशन द्वारा खरीदे गए रेशम से सेलाकुई में रेशम निर्मित कपड़े भी तैयार किए जा रहे हैं।

रेशम विभाग निरीक्षक हेम चंद ने बताया कि सबसे महंगा और उत्तम रेशम मोंगा रेशम माना जाता है, जो विशेषकर आसाम में अधिक मात्रा में तैयार किया जाता है।


किसानों का कहना है कि रेशम कीट पालन व्यवसाय में कम लागत में सीमित जगह में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इससे किसान न केवल स्थिर आजीविका सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे सकते हैं।

हल्द्वानी में रेशम कीट पालन व्यवसाय अब किसानों के लिए सफल और लाभकारी उद्योग के रूप में उभर रहा है।




