

स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्ट : ऋषि कपूर


हल्द्वानी में उत्तराखंड एकता मंच की ओर से एक महत्वपूर्ण जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। बैठक का प्रमुख मुद्दा रहा — उत्तराखंड में “फिफ्थ शेड्यूल एंड ट्राइब प्रावधान” को जल्द लागू करने की मांग।


बैठक के दौरान वक्ताओं ने जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड के मूल निवासी आज भी रोज़गार के अभाव में पलायन को मजबूर हैं, जबकि दूसरी ओर बाहरी लोग बड़ी संख्या में पहाड़ी क्षेत्रों में जमीनें खरीद रहे हैं और जंगलों में होटल व व्यावसायिक निर्माण कर रहे हैं।


पर्यावरण और संस्कृति पर संकट:
वक्ताओं ने कहा कि यह गतिविधियाँ न केवल स्थानीय संस्कृति और जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि राज्य के पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा बन रही हैं। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उत्तराखंड का पारंपरिक स्वरूप और सामाजिक ढांचा पूरी तरह से बदल सकता है।


वक्ताओं की प्रमुख बातें:
- “उत्तराखंड अगर अलग राज्य बना है, तो यहां के लोगों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा भी होनी चाहिए।”
- “फिफ्थ शेड्यूल जैसे संवैधानिक प्रावधान लागू कर स्थानीयों के हक को सुरक्षित किया जाए।”
- “पलायन को रोकने के लिए ठोस नीति और युवाओं को रोजगार देने की रणनीति बने।”

फिफ्थ शेड्यूल क्या है?
भारतीय संविधान का फिफ्थ शेड्यूल अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों के प्रशासन से संबंधित है, जो आदिवासी समुदायों को भूमि, संस्कृति और संसाधनों पर विशेष अधिकार देता है। वक्ताओं का कहना था कि उत्तराखंड के जनजातीय और पर्वतीय क्षेत्रों को इसी संरचना के तहत संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए।


एकता मंच की अपील:
मंच ने राज्य सरकार और भारत सरकार से मांग की कि उत्तराखंड के विशेष भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द फिफ्थ शेड्यूल लागू किया जाए।


