

रिपोर्ट – संजय कुंवर
स्थान – उर्गम, ज्योतिर्मठ

ज्योतिर्मठ क्षेत्र की जैव विविधता से समृद्ध कल्प घाटी (उर्गम वैली) में इन दिनों किसानों पर प्रकृति की दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर लगातार बदलते मौसम से खेती प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर भालुओं के आतंक ने उन्नतशील काश्तकारों की कमर तोड़ कर रख दी है।

बड़गिंडा से लेकर देवग्राम व कल्पेश्वर घाटी तक किसानों की कीमती फसलें, विशेषकर राजमा, भालुओं द्वारा बर्बाद की जा रही हैं। यह फसल यहां की आर्थिकी का मुख्य आधार मानी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि भालू रात के समय खेतों में घुसकर फसल रौंद देते हैं और दिन में भी अब दिखाई देने लगे हैं, जिससे भय का माहौल है।



ट्राउट फिश फॉर्म को भी नुकसान
भालुओं के आतंक का शिकार सिर्फ खेत ही नहीं बने हैं, बल्कि बड़गिंडा उर्गम क्षेत्र में स्थित ट्राउट फिश फॉर्म भी इसकी चपेट में आ गया है।

फॉर्म संचालक किशोरी लाल ने बताया कि भालुओं ने न सिर्फ उनकी राजमा की खड़ी फसल को नष्ट किया, बल्कि मछली फॉर्म में घुसकर मुख्य पानी आपूर्ति पाइप को तोड़ दिया, जिससे तालाब में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई। इस वजह से लाखों रुपये की ट्राउट मछलियां मर गईं।


किशोरी लाल ने बताया कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से यह फॉर्म खड़ा किया था, जो अब पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। वे वन विभाग और प्रशासन से मुआवजे और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं।
वन विभाग से कार्रवाई की मांग
उर्गम घाटी के काश्तकारों ने वन विभाग से भालुओं को काबू में करने की मांग करते हुए कहा है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो उनकी आजीविका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

ग्रामीणों ने कहा कि घाटी में वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन उन्हें नियंत्रित करने के लिए विभाग की ओर से कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।


प्रशासन से गुहार
ग्रामीणों और किसान संगठनों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि
- फसलों और पशुधन को पहुंचाए गए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए,
- किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए,
- और क्षेत्र में भालुओं के बढ़ते आतंक से स्थायी समाधान निकाला जाए।



