

स्थान-रुड़की



इंसानियत की मिसाल कहीं से भी सामने आ सकती है — उम्र इसकी सीमा नहीं होती। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया कुड़ी भगवानपुर गांव की चौथी कक्षा की छात्रा सहदीप कौर ने, जिसकी गुल्लक ने पूरे क्षेत्र के लोगों की आंखें नम कर दीं।



तीन साल से साइकिल खरीदने के लिए पैसे जोड़ रही मासूम सहदीप ने पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की तस्वीरें और खबरें देखीं तो उसकी मासूम आंखों में करुणा उमड़ आई। राहत अभियान के तहत जब गांव में विधायक उमेश कुमार पहुंचे, तो सहदीप अपनी गुल्लक लेकर उनके पास पहुंची और कहा कि वह अपनी पूरी बचत बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दान करना चाहती है।

जैसे ही सहदीप ने गुल्लक विधायक को सौंपी, उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद विधायक उमेश कुमार भी भावुक हो उठे। गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और राहत कार्यकर्ताओं की आंखें भी इस निस्वार्थता को देखकर भर आईं।



“उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन सोच और संवेदना बहुत बड़ी थी,” यह बात वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल में उतर गई।
विधायक उमेश कुमार ने बच्ची को गले लगाते हुए कहा, “सहदीप ने हम बड़ों को सिखा दिया कि असली दान क्या होता है। यह केवल पैसे की मदद नहीं, बल्कि दिल से दिया गया एक बड़ा संदेश है।”
सहदीप की ये गुल्लक अब महज एक खिलौना नहीं रही — यह संवेदना, सेवा और सच्चे मानवीय मूल्यों का प्रतीक बन चुकी है।




