बाजपुर में आवारा कुत्तों का आतंक, एक दिन में 60 लोगों को किया घायल

बाजपुर में आवारा कुत्तों का आतंक, एक दिन में 60 लोगों को किया घायल

लोकेशन : बाज़पुर
रिपोर्ट : अकरम चौधरी

देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा आवारा कुत्तों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए जाने के बावजूद उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में इनका आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते सोमवार को बाजपुर में एक ही दिन में करीब 60 लोगों को आवारा कुत्तों ने काट लिया, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, फिर भी नहीं हो रही सख्ती

गौरतलब है कि 11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ—न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन—ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे सभी शहरी और बाहरी क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को शीघ्रता से हटाने की कार्यवाही शुरू करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि इसके लिए यदि विशेष बल भी गठित करना पड़े, तो तुरंत किया जाए और इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की ढिलाई न हो।

हालांकि, इस सख्त आदेश के बावजूद ऊधम सिंह नगर प्रशासन द्वारा अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

सीएचसी बाजपुर में रिकॉर्ड संख्या में रेबीज के इंजेक्शन लगे

सीएचसी बाजपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी. डी. गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर प्रतिदिन कुत्ते के काटने के कुछ मामले सामने आते हैं, लेकिन सोमवार को स्थिति असाधारण थी। उन्होंने बताया,

“आज हमारे यहां 58 लोगों को रेबीज के टीके लगाए गए, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। यह वास्तव में चिंताजनक स्थिति है।”

एसडीएम ने दिया एक्शन का भरोसा

बाजपुर की उप जिलाधिकारी अमृता शर्मा ने घटना को गंभीर मानते हुए कहा कि,

“एक ही दिन में इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों के काटने की घटना अत्यंत चिंताजनक है। इस संबंध में संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है और जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी।

एनिमल लवर्स विरोध में, पर जनता में डर हावी

जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पशु प्रेमी इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों में भय और आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शासन-प्रशासन को आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए व्यवस्थित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।


निष्कर्ष:
बाजपुर की यह घटना न केवल एक स्वास्थ्य संकट का संकेत है, बल्कि यह दर्शाती है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन में भी ज़मीनी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से कदम उठाता है।