

स्थान: रामनगर,
संवाददाता:सलीम अहमद साहिल

बरसात का मौसम एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ और मैदान के बीच खौफ का पुल बन गया है। रामनगर विधानसभा क्षेत्र में स्थित राजस्व गांव चुकुम, जो विश्वविख्यात गर्जिया देवी मंदिर के समीप बसा है, इस समय कोसी नदी के विकराल रूप से पूरी तरह प्रभावित है।



लगभग 85 परिवारों वाला यह गांव रामनगर से कट चुका है। बच्चों के स्कूल जाने का कोई रास्ता नहीं है और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए न सड़क बची है न ही पुल। कोसी नदी की तेज धार ने दो मकानों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे गांव में दहशत का माहौल है।



इस संकट की घड़ी में एसडीएम रामनगर प्रमोद कुमार स्वयं राफ्टिंग बोट के माध्यम से राजस्व विभाग और डॉक्टर्स की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। तेज बहाव और जानलेवा लहरों के बीच उन्होंने हालात का जमीनी जायज़ा लिया और तत्काल दो प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से स्कूल में शिफ्ट करवाया।



डॉक्टरों की टीम ने मौके पर ही दो बुजुर्गों, एक पांच महीने के शिशु और 26 ग्रामीणों का प्राथमिक उपचार किया।

ग्रामीणों की आवश्यकताओं को देखते हुए एसडीएम प्रमोद कुमार ने अस्थाई रूप से राफ्टिंग बोट की व्यवस्था की है, जिससे बच्चे स्कूल जा सकें और ज़रूरी सामान गांव तक पहुंच सके।


चुकुम गांव के विस्थापन की फाइलें 1993 से लंबित थीं, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। प्रशासन ने हाल ही में आंपोखरा रेंज में ग्रामीणों को वैकल्पिक ज़मीन दिखाई, जिस पर गांववालों ने सहमति दे दी है।



स्थिति सामान्य होते ही गांव के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। ग्रामीणों में अब उम्मीद की किरण जगी है कि दशकों से टलता आ रहा उनका विस्थापन अब साकार रूप ले सकता है।



