

अल्मोड़ा, 4 अगस्त

उत्तराखंड को नशा मुक्त देवभूमि बनाने की दिशा में एक और ठोस कदम उठाते हुए अल्मोड़ा के बेस अस्पताल में राजकीय नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र का शुभारंभ कर दिया गया है। 30 बेड क्षमता वाले इस केंद्र को फिलहाल ट्रायल बेस पर शुरू किया गया है, और इसे राज्य मेंटल हेल्थ मानकों के अनुरूप बनाया गया है।


इस मौके पर जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पींचा ने केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखा और संचालनकर्ता संस्था को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

यह केंद्र होगा नशा मुक्ति अभियान की रीढ़:
जिलाधिकारी पांडेय ने कहा कि यह केंद्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “नशा मुक्त उत्तराखंड” संकल्प की दिशा में एक मजबूत स्तंभ साबित होगा। इससे अल्मोड़ा के साथ ही कुमाऊं क्षेत्र के अन्य जिलों को भी लाभ मिलेगा।



केंद्र की विशेषताएं:
- 24×7 काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट की उपलब्धता
- उपचार के दौरान मरीजों को निःशुल्क दवाएं, भोजन और अन्य सुविधाएं
- राज्य मेंटल हेल्थ नीति के अनुरूप पूर्ण संचालन
- भर्ती के लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड और अभिभावक का आधार कार्ड अनिवार्य



संचालन की जिम्मेदारी:
इस केंद्र का संचालन संकल्प नशा मुक्त देवभूमि ट्रस्ट संस्था (अल्मोड़ा) द्वारा किया जाएगा। जिलाधिकारी ने इसके संचालन के लिए जिला खनन न्यास फाउंडेशन निधि से 10 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं।
संस्था के प्रभारी आशुतोष सिंगसवाल ने बताया कि ट्रायल अवधि के दौरान परामर्श और उपचार पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।



कार्यक्रम में रहे प्रमुख अधिकारी मौजूद:
कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन चंद्र तिवारी, राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सीपी भैंसोड़ा, जिला समाज कल्याण अधिकारी आराधना त्रिपाठी, काउंसलर ममता जोशी और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पहल से प्रदेश के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने में एक नई उम्मीद जुड़ी है। अल्मोड़ा का यह केंद्र अब नशामुक्त उत्तराखंड की राह को मजबूत करेगा।



