खेल प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी, लोकसभा में पेश हुआ ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक’

खेल प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी, लोकसभा में पेश हुआ ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक’

देश में खेल प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को लोकसभा में ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक’ पेश किया। इस विधेयक में राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) के गठन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार को विशेष अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) का गठन

विधेयक के अनुसार, केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय खेल बोर्ड गठित करेगी, जिसे देश के सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) पर निगरानी रखने और नियम बनाने की व्यापक शक्तियाँ प्राप्त होंगी। यह बोर्ड बीसीसीआई जैसी शक्तिशाली संस्थाओं को भी अपनी निगरानी में लाएगा। सरकार से धन प्राप्त करने के लिए सभी खेल महासंघों को NSB से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

‘राष्ट्रीय हित’ में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी पर रोक

विधेयक में यह उल्लेख किया गया है कि असाधारण परिस्थितियों में, यदि राष्ट्रीय हित प्रभावित होता है, तो केंद्र सरकार किसी भारतीय खिलाड़ी या टीम की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी पर रोक लगा सकती है। यह प्रावधान खासकर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मैचों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खेल न्यायाधिकरण का गठन

विधेयक में एक ‘राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण’ के गठन का भी प्रावधान है, जिसे सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ प्राप्त होंगी। यह निकाय चयन, चुनाव और विवाद निपटान जैसे मामलों में अंतिम निर्णय देगा, जिसे केवल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।

प्रशासकों के लिए आयु सीमा में छूट

वर्तमान राष्ट्रीय खेल संहिता में प्रशासकों की अधिकतम आयु 70 वर्ष निर्धारित है, लेकिन नए विधेयक में 75 वर्ष तक चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है, बशर्ते संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्था इसके पक्ष में हो।


बीसीसीआई पर निगरानी और आरटीआई का विरोध

विधेयक के तहत सभी मान्यता प्राप्त खेल महासंघों को आरटीआई अधिनियम के दायरे में लाया जाएगा। बीसीसीआई ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि वह सरकारी धन पर निर्भर नहीं है और इसलिए उस पर यह नियम लागू नहीं होना चाहिए।

बीसीसीआई की प्रतिक्रिया

बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने संसद भवन के बाहर कहा, “हम विधेयक का अध्ययन करेंगे और देखेंगे कि क्या इसे समिति के पास भेजा जाना चाहिए। उसके बाद ही कोई अंतिम टिप्पणी की जाएगी। हम सरकार से भी चर्चा करेंगे।”

खेल मंत्रालय ने साफ किया है कि ओलंपिक में शामिल सभी खेल संस्थाओं को कानून का पालन करना अनिवार्य होगा, और बीसीसीआई को भी इससे कोई छूट नहीं दी जाएगी।


भारत की नजर 2036 ओलंपिक मेज़बानी पर

भारत वर्तमान में 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की दौड़ में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के चार्टर के अनुसार, भारत को राजनीतिक आधार पर भेदभाव से बचना होगा। इसी कारण भारत ने हाल में हॉकी एशिया कप और जूनियर निशानेबाजी विश्व कप में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वीज़ा देकर भागीदारी की अनुमति दी थी।


NSB में कौन होंगे सदस्य?

राष्ट्रीय खेल बोर्ड में एक अध्यक्ष और कई सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा योग्य, ईमानदार और प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से की जाएगी। चयन प्रक्रिया एक खोज-सह-चयन समिति के माध्यम से होगी, जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे:

  • कैबिनेट सचिव या खेल सचिव (अध्यक्ष)
  • भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक
  • दो अनुभवी खेल प्रशासक
  • एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी (द्रोणाचार्य, अर्जुन या खेल रत्न पुरस्कार विजेता)