

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों वाली विशेष संविधान पीठ ने राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए 14 प्रेजिडेंशियल रेफरेंस मामलों पर सोमवार को केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। ये मामले राज्यपालों और राष्ट्रपति द्वारा विधेयकों की मंजूरी में देरी से संबंधित हैं। इस पर अब अगली सुनवाई अगस्त मध्य में होगी।



मामला क्या है?
यह मामला संसद या किसी राज्य की विधायिका द्वारा पारित विधेयकों को राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा मंजूरी देने में लगने वाले समय से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए कोई समयसीमा निर्धारित की जा सकती है या नहीं।



कौन-कौन हैं संविधान बेंच में?
इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की अध्यक्षता में की जा रही है। उनके साथ संविधान पीठ में ये न्यायाधीश शामिल हैं:


- जस्टिस सूर्यकांत
- जस्टिस विक्रम नाथ
- जस्टिस पीएस नरसिम्हा
- जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर
यह बेंच विशेष रूप से इसलिए भी अहम है क्योंकि इनमें से चार जज भविष्य में CJI बन सकते हैं।

- जस्टिस सूर्यकांत – नवंबर 2025 में संभावित CJI
- जस्टिस पीएस नरसिम्हा – अक्टूबर 2027 में संभावित CJI


अब आगे क्या?
- मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई की टाइमलाइन तय करेगा।
- अगस्त के मध्य इसपर आगे की विस्तृत सुनवाई की जाएगी।
- यह भी तय किया जाएगा कि क्या संवैधानिक पदों पर बैठे राष्ट्रपति या राज्यपाल निर्णयों में अनावश्यक देरी के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं या नहीं।

पृष्ठभूमि
हाल के वर्षों में कई राज्यों ने आरोप लगाए हैं कि उनके द्वारा पारित विधेयक महीनों तक राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार करते रहते हैं, जिससे राज्य सरकारों का कामकाज बाधित होता है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति ने 14 प्रेजिडेंशियल रेफरेंस सुप्रीम कोर्ट को भेजे हैं, जिसपर अब संवैधानिक व्याख्या होनी है।


