कांवड़ मेले से पहले उठी हिल बाईपास खोलने की मांग, उत्तरी हरिद्वार के लोगों के लिए बन सकता है ‘संजीवनी’

कांवड़ मेले से पहले उठी हिल बाईपास खोलने की मांग, उत्तरी हरिद्वार के लोगों के लिए बन सकता है ‘संजीवनी’

स्थान : हरिद्वार

सावन के पावन महीने में हरिद्वार में लगने वाले कांवड़ मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के चलते जहां पूरा शहर धार्मिक रंग में रंग जाता है, वहीं भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम स्थानीय निवासियों, खासकर उत्तरी हरिद्वार की आबादी के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन जाते हैं। इसी के मद्देनजर इस बार स्थानीय लोगों ने हिल बाईपास को खोलने की पुरज़ोर मांग उठाई है।

हर साल कांवड़ मेले के दौरान जब शहर की सड़कें और हाईवे श्रद्धालुओं की भीड़ से भर जाते हैं, तब अस्पताल, कॉलेज और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में स्थानीय निवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केवल हिल बाईपास ही ऐसा विकल्प बनता है जो जाम की स्थिति में ‘संजीवनी’ का काम कर सकता है।

दो साल से बंद है हिल बाईपास
उत्तर दिशा से पहाड़ों के बीच होकर गुजरने वाला हिल बाईपास बीते दो वर्षों से लैंडस्लाइड और मलबा जमा होने के कारण बंद पड़ा है। स्थानीय निवासी अजय गिरी का कहना है कि, “यह रास्ता हमारे लिए जीवनरेखा है। जब हाईवे पूरी तरह जाम हो जाता है, तब यही बाईपास हमारे लिए एकमात्र सहारा बनता है। प्रशासन को कांवड़ मेला शुरू होने से पहले इस मार्ग को खोलना चाहिए।”

कानूनी पेंच और मरम्मत की बाधाएं
वहीं प्रशासन का कहना है कि हिल बाईपास का एक हिस्सा रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसकी वजह से इसके रखरखाव और मरम्मत में कानूनी अड़चनें आती हैं। बीते कुछ वर्षों में पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड के चलते यह मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है और अभी तक इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मार्ग को आंशिक रूप से खोलने पर विचार किया जा रहा है ताकि कम से कम आपात स्थिति में इसका उपयोग किया जा सके।

स्थानीय लोगों की अपील
मेला शुरू होने से पहले उत्तरी हरिद्वार के निवासी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं को शीघ्रता से पूरा कर हिल बाईपास को खोला जाए। ऐसा न होने पर न केवल आम जनता को परेशानी होगी, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।

हरिद्वार प्रशासन के लिए यह एक महत्वपूर्ण निर्णय होगा, जिससे न केवल स्थानीय निवासियों की सुविधा सुनिश्चित होगी, बल्कि कांवड़ मेले के दौरान शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को भी कुछ हद तक राहत मिल सकती है।