नरेंद्रनगर के नसोगी गांव में आस्था का प्रतीक बन रहा मां बाल कुंवारी मंदिर, ग्रामीण कर रहे भव्य निर्माण

नरेंद्रनगर के नसोगी गांव में आस्था का प्रतीक बन रहा मां बाल कुंवारी मंदिर, ग्रामीण कर रहे भव्य निर्माण

नरेंद्रनगर (टिहरी)

नरेंद्रनगर विकासखंड की पट्टी दोगी के छोटे से गांव नसोगी में इन दिनों भक्ति और सामूहिक सहयोग का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। लगभग 35-40 परिवारों की आबादी वाले इस गांव में ग्रामीण मां बाल कुंवारी के प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण मंदिर के स्थान पर भव्य मंदिर निर्माण में जुटे हुए हैं। मंदिर निर्माण को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह और आस्था का भाव देखने को मिल रहा है।

ग्रामीण अपने सीमित संसाधनों और आपसी सहयोग से करीब 35 से 40 लाख रुपये की लागत से मंदिर निर्माण करवा रहे हैं। बारिश और विषम परिस्थितियों के बावजूद गांव की महिलाओं और पुरुषों ने दिन-रात एक कर मंदिर के लेंटर डालने तक का कार्य पूरा किया। यह आस्था और समर्पण का ऐसा उदाहरण है, जो किसी को भी प्रेरित कर सकता है।

प्रदेश के वन मंत्री और क्षेत्रीय विधायक सुबोध उनियाल ने भी इस कार्य में सहयोग करते हुए ₹1.5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

मां बाल कुंवारी: ग्रामीणों की ईष्ट और रक्षक देवी

ग्रामीणों का मानना है कि मां बाल कुंवारी गांव की रक्षक देवी हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल के दौरान मां की कृपा से गांव का कोई भी व्यक्ति संक्रमण की चपेट में नहीं आया। मां के प्रति यह आस्था ही है कि गांव का हर परिवार मंदिर निर्माण में तन-मन-धन से योगदान दे रहा है।

ग्रामीणों का विश्वास है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां से मन्नत मांगता है, मां उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं।

आस्था के प्रतीक मंदिर का बेसब्री से इंतजार

अब गांववासियों को इंतजार है उस पल का, जब मां बाल कुंवारी भव्य नए मंदिर में विराजमान होंगी। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य में भागीदारी कर वे स्वयं को धन्य मानते हैं।

यह मंदिर न केवल धार्मिक केंद्र बनेगा, बल्कि ग्रामीणों की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक होगा। नसोगी गांव में मंदिर निर्माण का यह प्रयास प्रदेश भर के लिए सामुदायिक सहयोग और आस्था की मिसाल बनता जा रहा है।