

रुड़की
संवाददाता – प्रवेश राय

रायवाला निवासी चिकित्सक डॉ. प्रवीण प्रकाश ने एडवोकेट संजीव वर्मा पर धोखाधड़ी और जबरन बंधक बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली रोड स्थित एक कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर पूरे प्रकरण की जानकारी दी और पुलिस प्रशासन पर भी चार्जशीट दाखिल न करने को लेकर नाराजगी जताई।

चिकित्सक का आरोप:


डॉ. प्रवीण प्रकाश, जो कभी अपोलो अस्पताल में 15 वर्षों तक सेवा दे चुके हैं, का कहना है कि उनका रायवाला में एक रिसर्च स्टेशन है और जमीन से जुड़ा विवाद चल रहा था। इसी मामले में वह एडवोकेट संजीव वर्मा के संपर्क में आए।

- वर्मा ने उन्हें यह कहकर अपने घर बुलाया कि उनकी जान को खतरा है।
- चिकित्सक के अनुसार, तीन महीने तक उनकी इच्छा के विरुद्ध वर्मा ने उन्हें अपने घर में रखा और नैनीताल और लखनऊ भी ले गए।
- इस दौरान उनसे ₹10 लाख की रकम भी वसूल ली गई, जिसकी नोटरी भी कराई गई, लेकिन रकम देने के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया और नोटरी वर्मा अपने पास रख ली।


डॉ. प्रवीण का यह भी कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले में फरवरी 2024 में मुकदमा दर्ज करवाया था लेकिन 16 महीने बाद भी पुलिस ने चार्जशीट दाखिल नहीं की है। उन्होंने कहा कि वह आज आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और शिवालिक नगर में चौकीदार की नौकरी कर जीवनयापन कर रहे हैं।

एडवोकेट संजीव वर्मा का पक्ष:
संजीव वर्मा ने चिकित्सक के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उनकी पहली मुलाकात चिकित्सक से रायवाला थाने में हुई थी। मानवीयता के नाते उन्होंने चिकित्सक को तीन महीने अपने पास रखा, लेकिन वह स्वेच्छा से घूमते-फिरते रहे, किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई।

- उन्होंने बताया कि मामला अब उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है।


प्रमुख सवाल उठाए गए:
- क्या पुलिस ने मामले में निष्पक्ष जांच की?
- चार्जशीट दाखिल करने में देरी क्यों?
- क्या चिकित्सक की कथित आर्थिक व मानसिक पीड़ा की प्रशासन ने कोई सुध ली?

मामले की संवेदनशीलता:
यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत विवाद बनकर रह गया है बल्कि इसमें कानून व्यवस्था, पुलिस निष्क्रियता, और न्यायिक प्रक्रिया में देरी जैसे गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। यदि चिकित्सक के दावों में सत्यता है तो यह एक पेशेवर का शोषण है, वहीं यदि आरोप झूठे हैं तो यह कानून का दुरुपयोग भी हो सकता है।


