

देहरादून

जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने बुधवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए राज्य सरकार की क्लस्टर विद्यालय योजना को अव्यवस्थित और छात्रों के लिए हानिकारक बताया।




उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में प्रदेश के तीन-चार पास के विद्यालयों को मिलाकर एक इंटरमीडिएट विद्यालय को मुख्य क्लस्टर विद्यालय घोषित किया है, लेकिन बिना किसी संसाधन विकास के इस योजना को लागू कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों और छात्रों में भारी आक्रोश है।


“कैसे पढ़ेगा छात्र 10–15 किमी दूर जाकर?”
नेगी ने कहा कि सरकार ने लगभग 559 क्लस्टर विद्यालय चिन्हित कर 2500 से अधिक विद्यालयों को उनके अधीन कर दिया है, लेकिन कई स्कूल ऐसे हैं जहां छात्र संख्या 150–200 के बीच है, फिर भी उन्हें मर्ज किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि

“ऐसे में छात्र अपने मूल विद्यालय को छोड़कर 5, 10 या 15 किलोमीटर दूर जाकर कैसे पढ़ाई करेगा?”

“तथ्यों की बिना पड़ताल, खंड स्तर के अधिकारियों की लापरवाही”
रघुनाथ सिंह नेगी ने इस फैसले के पीछे खंड स्तर के अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि
“बिना भौतिक सत्यापन और छात्रों की वास्तविक संख्या की जांच किए रिपोर्ट भेजी गई, जिसके आधार पर उच्च अधिकारियों ने यह ‘तुगलकी फरमान’ जारी कर दिया।”

“सरकार की नीयत ठीक, पर तैयारी अधूरी”
उन्होंने कहा कि सरकार यदि चाहती तो यह योजना शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सशक्त कदम बन सकती थी, लेकिन बिना संसाधन, बिना बस या ट्रांसपोर्ट सुविधा, और बिना अध्यापकों की व्यवस्था के यह फैसला छात्रों और उनके परिवारों के लिए बोझ बन गया है।
शिक्षा मंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल
मोर्चा अध्यक्ष ने शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा,


“इस पूरे मामले में मंत्री की मॉनिटरिंग कहां है? क्या वे ज़मीनी हकीकत को देख रहे हैं?”
जल्द रखेंगे मामला शासन के सामने
उन्होंने कहा कि मोर्चा इस मामले को शीघ्र ही शासन के समक्ष रखेगा और छात्रों के हित में बदलाव की मांग करेगा।


