


रिपोर्ट – नीरज कंडारी
चमोली,उत्तराखंड

गैरसैंण, 13 जून
जहां एक ओर सरकारें देशभर में सड़क नेटवर्क विस्तार के दावे कर रही हैं, वहीं उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के नजदीकी गांव सेरा-तेवाखर्क के ग्रामीण आज भी मोटर मार्ग जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। हालत यह है कि बीमारों और प्रसूता महिलाओं को डंडी में कांधों पर उठाकर सड़क तक लाना पड़ता है।



बीमार भगवत सिंह को डंडी से ले जाया गया अस्पताल
हाल ही में गांव के निवासी भगवत सिंह को गंभीर हालत में उपचार के लिए ऋषिकेश ले जाना पड़ा। सड़क न होने के कारण गांव की महिलाओं ने उन्हें डंडी में बिठाकर कई किलोमीटर पैदल पहाड़ी रास्ता तय कर सड़क तक पहुंचाया, जहां से उन्हें अस्पताल भेजा गया।


चार साल पहले हादसे का शिकार हुए थे भगवत
निवर्तमान ग्राम प्रधान हेमा बिष्ट ने बताया कि भगवत सिंह चार साल पहले एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनके पैर में रॉड डली हुई है और समय-समय पर उन्हें इलाज के लिए ऋषिकेश जाना पड़ता है। पर गांव में सड़क न होने के कारण हर बार उन्हें डंडी में ले जाना पड़ता है।


महिलाएं निभा रहीं ‘रक्षक’ की भूमिका
हेमा बिष्ट ने यह भी बताया कि गांव के अधिकांश पुरुष रोज़गार के लिए बाहर रहते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में गांव की महिलाएं ही बीमारों और प्रसूताओं को कांधे पर उठाकर सड़क मार्ग तक लाती हैं। उन्होंने कहा, “सरकारें इक्कीसवीं सदी की बातें कर रही हैं, लेकिन हम आज भी आदिकाल जैसे जीवन को जीने को मजबूर हैं।”


सड़क का काम अधूरा, पुल निर्माण बना रोड़ा
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता हुकम सिंह बिष्ट ने बताया कि 2021 में लोक निर्माण विभाग द्वारा गांव के लिए सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया था। लेकिन रामगंगा नदी पर बनने वाले 40 मीटर स्पान के पुल के लिए अब तक धन स्वीकृत नहीं हो पाया है, जिसके चलते मोटर मार्ग का कार्य अधर में लटका हुआ है।


जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से अपील
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पुल निर्माण के लिए बजट जारी कर अधूरी सड़क को पूरा कराया जाए ताकि गांव के लोगों को सम्मानपूर्वक और सुरक्षित जीवन मिल सके।




