


रिपोर्ट – ललित जोशी

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में मंगलवार को कुमाऊं आयुक्त एवं जिला विकास प्राधिकरण अध्यक्ष दीपक रावत ने जिला विकास प्राधिकरण कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन मानचित्र स्वीकृति, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई, लंबित वादों की स्थिति, अभिलेखों के डिजिटलीकरण और कंपाउंडिंग से संबंधित मामलों की गहन समीक्षा की।




आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:

- लंबित वादों का शीघ्र निस्तारण किया जाए, विशेष रूप से सबसे पुराने मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
- भवन मानचित्रों की स्वीकृति निर्धारित समय सीमा में हो, इसके लिए सेवा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन को सुदृढ़ किया जाए और सभी अभिलेख सुव्यवस्थित रूप से रखे जाएं।
2650 वाद लंबित, 1502 पुराने – 1999 से लेकर अब तक
प्राधिकरण के सचिव विजय नाथ शुक्ल ने बताया कि वर्तमान में 2650 वाद लंबित हैं, जिनमें से 1502 वाद पुराने हैं (अधिकांश ऑफलाइन) तथा 1148 वाद ऑनलाइन प्रक्रिया में हैं। इस पर आयुक्त ने वर्षवार और श्रेणीवार सूची एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।



न्यायालयों में देरी पर जताई नाराजगी
दीपक रावत ने पाया कि कई मामलों में वर्ष 2019 से अब तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई, जो गंभीर लापरवाही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक दिन 60-70 मामलों की सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यदि तय समय पर सूची उपलब्ध नहीं कराई गई, तो प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी।
अवैध निर्माणों पर सिर्फ नोटिस से काम नहीं चलेगा
आयुक्त ने कहा कि अवैध निर्माण पर सिर्फ नोटिस देने की खानापूर्ति न करते हुए, समयबद्ध वाद दर्ज कर सुनवाई और निस्तारण किया जाए। लगातार अनुपस्थित रहने वाले विपक्षियों को अंतिम तिथि देकर निर्णय लिया जाए।


मानचित्र स्वीकृति में देरी पर स्पष्टीकरण तलब
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि तीन अवर अभियंता और एक सहायक अभियंता द्वारा 30 दिन से अधिक समय से भवन मानचित्र आवेदनों का निस्तारण नहीं किया गया था। इस पर आयुक्त ने सभी से स्पष्टीकरण तलब किया और एक सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट देने को कहा।


डिजिटलाइजेशन व पारदर्शिता पर जोर
उन्होंने रिकार्ड रूम का भी निरीक्षण किया और 1999 से अब तक के लंबित वादों की वर्षवार पत्रावलियों का अध्ययन किया। साथ ही यह निर्देश दिए कि ऑनलाइन पोर्टल पर की जा रही कार्रवाई की नियमित समीक्षा की जाए।



