


रिपोर्ट… अकरम चौधरी
लोकेशन.. बाजपुर

उत्तराखंड राज्य के उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में स्थित तराई पश्चिम वन प्रभाग क्षेत्र में जंगली जानवरों की बड़ी संख्या निवास करती है, जिसमें बाघ, हाथी, हिरण और अन्य वन्य जीव शामिल हैं। गर्मी के मौसम में जंगलों में पानी की कमी के कारण ये जानवर मानव बस्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।



जल संकट और वन्यजीव संघर्ष

गर्मी के बढ़ते प्रकोप में जंगलों में जल स्रोत सूखने लगते हैं, जिससे जानवरों को पानी की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आना पड़ता है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ जाती हैं, जैसे कि हाथी और बाघों का फसलों को नुकसान पहुँचाना या मानवों पर हमला करना।

वन विभाग के प्रयास
तराई पश्चिम वन प्रभाग के वन क्षेत्राधिकारी (DFO) प्रकाश आर्य के नेतृत्व में वन विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं:

वाटर होल्स का निर्माण: जंगलों में जानवरों के लिए अस्थायी जलाशयों और तालाबों का निर्माण किया गया है, जहाँ वे पानी पीने आ सकें।



जल आपूर्ति की निगरानी: इन जलाशयों में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो जलाशयों में पानी भरने का कार्य करती हैं।
सीसीटीवी निगरानी: वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों की स्थापना की गई है, जिससे उनकी सुरक्षा और संरक्षण में मदद मिलती है।
स्थानीय समुदाय की भूमिका

स्थानीय निवासी, जैसे कि बाजपुर के हरिपुरा हर्सन गाँव के अशोक पंत, इन जलाशयों में पानी भरने का कार्य करते हैं। उनका कहना है कि “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्मी के मौसम में वन्यजीवों को पानी की कमी न हो और वे मानव बस्तियों की ओर रुख न करें।”


निष्कर्ष
तराई पश्चिम वन प्रभाग में वन्यजीवों के लिए जल संकट एक गंभीर समस्या है, जिसे वन विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर सुलझा रहे हैं। इन प्रयासों से न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आई है।

यह पहल अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहाँ वन्यजीवों और मानवों के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जा सकता है।


