

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने वक्फ संशोधन बिल को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि यह बिल मुस्लिम समाज के लिए एक सकारात्मक कदम साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में कांग्रेस के लगभग साठ साल के कार्यकाल के दौरान जिन गरीबों के लिए संपत्तियां दान की गई थीं, उनका कोई कल्याण नहीं हुआ। केवल वक्फ बोर्डों के अध्यक्षों का ही फायदा हुआ।


मुफ्ती कासमी ने यह भी कहा कि कुछ लोग मुसलमानों को यह भ्रमित कर रहे हैं कि मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर कब्जा हो जाएगा, जबकि यह वही लोग हैं जिन्होंने मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में देखा और उन्हें मुख्यधारा से दूर रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर वक्फ की संपत्तियों पर स्कूल, विश्वविद्यालय और अस्पताल बनाए गए होते तो गरीबों का भला हो सकता था।


इसके अलावा, कासमी ने उत्तराखंड में लागू हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के बारे में कहा कि कुछ लोगों ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताया, जबकि यह ऐसा नहीं है। उन्होंने वक्फ बिल को लेकर उठाए जा रहे शंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह बिल मुस्लिम समाज के लिए फायदेमंद साबित होगा।


इस बयान से साफ जाहिर होता है कि मुफ्ती शमून कासमी वक्फ संशोधन बिल को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं और इसे मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।



