काशीपुर का ऐतिहासिक चैती मेले का अस्तित्व खतरे में है

काशीपुर का ऐतिहासिक चैती मेले का अस्तित्व खतरे में है

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रिपोटर -अज़हर मलिक

स्थान -काशीपुर

पारंपरिक वर्षों से लगता आ रहा मां भगवती बाल सुंदरी देवी का ऐतिहासिक चैती मेले का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है। बढ़ती महंगाई मेले को खत्म करने में लगी हुई है।ऐतिहासिक मेले का अस्तित्व इतिहास के किताबों में बंद होने के खतरे से गुज़र रहा है। मेले के अस्तित्व के बढ़ते खतरे की ओर अभी किसी की ध्यान भी नहीं, भारी मात्रा में लगने वाली दुकानों की गिनती में कमी आ रही है। हजारों की दुकान के दाम लाखों में कर दिए क्या है पूरा मामला देखिए हमारी एक स्पेशल क्या इतिहास के पन्नो में सिमट कर रह जाएगा काशीपुर का ऐतिहासिक चैती मेला? चैती मेले का अस्तित्व को खतरे में डालने के पीछे आखिर कौन आखिर किस के इशारों पर दुकानदारों की जेबों पर डाला जा रहा डाका चैती मेले के अस्तित्व का दुश्मन आख़िर कोन सरकारी तंत्र या टेंडर लेने वाले ठेकेदार जनपद उधम सिंह नगर के काशीपुर में लगने वाला ऐतिहासिक मां भगवती सुंदरी देवी का चैती मेले का शुभारंभ हो चुका है

लेकिन इस बार ऐतिहासिक चैती मेला महंगाई की भेंट चढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है, काशीपुर में लगने वाला चैती मेला अपने आप में एक ऐतिहासिक मेला है। लेकिन सरकारी तंत्र की उदासीनता के चलते टेंडर प्रक्रिया के बाद दुकानों के ऊंचे दाम मांगे जा रहे हैं जो दुकान कभी 7000 में दुकानदार को मिल जाती थी उस दुकान के 20 से ₹25000 मांगे जा रहे हैं इतना ही नहीं 40 वाट का एक एलईडी बल्ब के बिल भी 2000 से 3000 के बीच वसूला जा रहा है। मेले के ठेकेदारों के मनमानी दामों पर मेले का अस्तित्व खतरे में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। मेले में लगने वाली दुकानों के बढ़ते दामों को देखकर दूरदराज से दुकानदारों ने मेले की शुभारंभ होने के बाद भी अपनी दुकानों का शुभारंभ नहीं किया बस दुकानदार इंतजार कर रहे हैं कि कब दुकानों के दाम कम हो और दुकानदार अपनी दुकानें लगाकर मेले की रौनक बढ़ाएं बरहाल मनमानी दामों ने मेले की रौनक खत्म कर दी है। ठेकेदारों के मनमानी दामों ने कहीं ना कहीं मेले के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। और क्या कुछ कहना है

अपने आप में इतिहास रखने वाला ऐतिहासिक चैती मेले का अस्तित्व कहीं ना कहीं ठेकेदारों के दामों के चलते खत्म होता हुआ दिखाई दे रहा है। मेले के  लगने वाली दुकानों के दामों ने लोगों को दुकान ना लगाने के मजबूर कर दिया है। समय रहते अगर सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो मेले का अस्तित्व सिर्फ किताबों के पन्नों पर ही यादगार बन कर रह जाएगा।