तीन सौ साल पहले का ऐतिहासिक निर्माण

तीन सौ साल पहले का ऐतिहासिक निर्माण

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रिपोटर -दीपक नौटियाल

स्थान -उत्तरकाशी

जनपद उत्तरकाशी जोकि पोराणिक रूप में उत्तर की काशी के नाम से जानी जाती हैं एवं कभी भारत एवं तिव्वत के बीच व्यापारिक रूप से सबसे बड़ी मंडी के रूप में जानी जाती थी पर आज हम बात कर रहें हैं भारत एवं तिव्वत के बीच व्यापारिक रास्ते जिससे यहां के लोग तिव्वत में ओर तिव्वत के लोग बकरियों एवं यकों में लाद कर सामान का अर्दान प्रदान करते थे

और आज वह गरतांग गली पर्यटन के सबका ध्यान आकर्षित कर रही है यहां रास्ता चोटिले पर्वत को काटकर बनाया गया है कहते हैं कि इस रास्ते को सीमांन्त क्षेत्र के व्यापारियों के अनुरोध पर 17वीं सताब्दी में पेशावर से आये पठानों ने इस मार्ग का निर्माण किया था जो भारत एवं चीन के बीच युद्ध के बाद बन्द कर दिया गया था पर अब इस रास्ते को आम पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है और लोग यहां घूमने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं

अपने ऐतिहासिक इतिहास को संभालें इस विरासत को आप भी देखें कि कैसे भारत के लोग तिब्बत में अपना सामान बेचते थे गंगोत्री धाम से थोड़ा पहले भैरव घाटी के पुल के पास से कितनी मेहनत से विशाल चट्टान को काट कर इसका निर्माण किया गया होगा