12 साल बाद मंदिर से बाहर आई दुध्याड़ी देवी की डोली

12 साल बाद मंदिर से बाहर आई दुध्याड़ी देवी की डोली

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रिपोटर -दीपक नौटियाल

स्थान -उत्तरकाशी

दुध्याड़ी देवी की डोली, 37 दिन पैदल चलकर उत्तरकाशी पहुंची, यहां हुआ भव्य स्वागत टिहरी जिले के पौनाडा गांव के मंदिर में 12 साल तक तपस्या करने के बाद दुध्याड़ी देवी भक्तों के दर्शन को बाहर निकली है। टिहरी जिले के सैकड़ों गांव में करीब 37 दिन तक पैदल सफर करने के बाद आज दुध्याड़ी देवी उत्तरकाशी जिले की सीमा पर स्थित ब्रह्मपुरी गांव पहुंची। जहां गाजणा पट्टी के गांव-गांव से सैकड़ों भक्तों की भीड़ दर्शन को उमड़ पड़ी। इस दौरान भक्तों ने देवी का फूल मालाओं से भव्य स्वागत कर मन्नतें मांगी। इस दौरान देवी ने पंचों को ब्रह्मपुरी में देवी का मंदिर बनाने की सहमति दी है।उत्तराखंड को देवभूमि यूं ही नहीं कहते हैं। यहां के कण कण में देवी देवता वास करते हैं।

यहां की देव डोलियां हो या फिर पशुवा (मनुष्यों में देवता का रूप अवतरित होने वाले) का अपना अलग अलग महत्व है। ऐसा ही एक अलग उदाहरण टिहरी जिले के गोनगढ़ पट्टी के पौनाड़ा गांव की दुध्याड़ी देवी का देशभर में अद्भुत उदाहरण है। देवी अपने मंदिर और उसमें बनी गुफा में 12 साल तक तपस्या पूरी करने के बाद दिसंबर माह में भक्तों को दर्शन देने को बाहर निकली। इस दौरान पौनाड़ा गांव में भव्य मेला आयोजित किया गया। मेले के बाद देवी क्षेत्र के बालगंगा, आगर, बासर पट्टी के गांव होते हुए करीब 37 दिन की पैदल यात्रा के बाद अपने मायके यानी उत्तरकाशी जिले में प्रवेश किया। यहां देवी का स्थानीय देवी दुध्याड़ी की डोली, गुरु चौरन्गीनाथ, नर्सिंग देवता, जगदेऊ देवता, नागराजा देवता के निशान के साथ देवी के मायके ब्रह्मपुरी में भक्तों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान गांव में देश- विदेश से जुटे सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने देवी की पूजा अर्चना, मंडाण लगाया और पिटाई लगाकर देवी को विदा किया। पंचायती चौक पर देवी के दर्शन को गाजणा पट्टी के कई गांव से भक्तों का सैलाब उमड़ा। इस दौरान गांव के लोगों ने देवी से सुख, समृद्धि, शांति की कामना की मन्नतें की। गांव में युवा मंडल ने देवी के स्वागत में अहम भूमिका निभाई हैमकर संक्रांति पर उत्तरकाशी में स्नानउत्तरकाशी के प्रवेश द्वार के ब्रह्मपुरी गांव पहुंचने बाद दुध्याड़ी देवी की डोली यात्रा गांव भर में भक्तों के दर्शन के लिए गई। इसके बाद कमद गांव होते हुए सेम थाण्डी गांव पहुंची। जहां रात्रि विश्राम के बाद पुनः कमद, कुमारकोट गांव होते हुए हरुनता बुग्याल, वायाली से किशनपुर, मानपुर, तिलोथ,जोशियाड़ा, ज्ञानसू होते हुए मकर संक्रांति के पर्व पर मणिकर्णिका घाट पर माघ मेले में गंगा स्नान करेगी। इसके बाद देवी उत्तरकाशी बाजार में भक्तों को दर्शन देगी और उजेली होते हुए गाजणा पट्टी के दिखोली गांव, सिरी गांव होते हुए अपने मंदिर की तरफ बढ़ेगी।

जहां देवी भगवात महायज्ञ के बाद पुनः देवी 12 साल के लिए मंदिर में विराजमान हो जाएगी।टिहरी जिले के पौनाड़ा गांव में दुध्याड़ी देवी की यात्रा, मेला समिति के अध्यक्ष पूरब सिंह बताते हैं कि देवी 12 साल तक मंदिर के गर्भगृह में तपस्या करती है। इसके बाद 12 साल के उपरांत मंदिर के गर्भगृह से भक्तों के दर्शन को बाहर आती है।उन्होंने बताया कि भक्तों की देवी पर अपार आस्था है और देवी भी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है। उन्होंने कहा कि दुध्याड़ी देवी जैसी यात्रा पूरे देशभर में कहीं नही होती है।