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रिपोर्टर- पंकज सक्सेना

स्थान- हल्द्वानी

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की सरगर्मी इस बार बहुत तेज़ है | उत्तराखंड के 2 प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा दोनों शीर्ष पार्टियाँ ही सत्ता हासिल करने के लिए अपनी-अपनी रणनीति में जुट गये हैं | वहीं अगर बात करें कुमाऊं की हॉट सीट कही जाने वाले हल्द्वानी की तो हल्द्वानी विधानसभा सीट पर 2017 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी | उत्तराखंड राज्य बनने के बाद राज्य में चार बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमे से हल्द्वानी सीट पर तीन बार कांग्रेस अपना परचम लहरा चुकी है।

वहीं भाजपा सिर्फ एक बार हल्द्वानी सीट को अपने नाम कर पाई। नैनीताल ज़िले के अंतर्गत आने वाली हल्द्वानी विधानसभा को 2017 में कांग्रेस से इंदिरा हृदयेश ने भारतीय जनता पार्टी के जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला को 6557 मतों से हराकर अपने नाम किया था। लेकिन इंदिरा हृदयेश के स्वर्गवास के बाद अब इस सीट पर किसका कब्जा होता है, यह देखने वाली बात होगी | हालांकि कांग्रेस की तरफ से सुमित हृदयेश को हल्द्वानी सीट पर उतारा गया है और वह अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त भी हैं |


लेकिन एक बार फिर भाजपा ने डॉक्टर जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला पर अपना भरोसा जताया है जबकि जोगेंद्र पाल सिंह एक बार इंदिरा हृदयेश से हार चुके हैं | बता दें जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला हल्द्वानी नगर निगम के दो बार मेयर रहें हैं | वहीं भाजपा और कांग्रेस के साथ इस बार राज्य में तीसरे विकल्प के रूप में आम आदमी पार्टी भी खड़ी है | वहीं हल्द्वानी से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी समित टिक्कू हैं |


उत्तराखंड के अंदर अब आम आदमी पार्टी भी लगातार अपने पैर पसार रही हैं जो कहीं ना कहीं भाजपा और कांग्रेस के समीकरण को बिगाड़ सकती है | वहीं हल्द्वानी में एक और विकल्प समाजवादी पार्टी की बात करें तो हल्द्वानी शहर के अंदर लगभग अधिकांश मुस्लिम मतदाता है, जिस पर कांग्रेसी अपना कब्जा बताती आ रही है लेकिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी शोएब अहमद ने लगातार पिछले 5 सालों में जनता के बीच रहकर अपना अस्तित्व बनाया है |


अब देखना होगा कि हल्द्वानी की जनता शोएब अहमद को कितने वोट दिलाती है | शोएब अहमद भी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं | बता दें हल्द्वानी की सीट सबसे जानी-मानी सीट कहलाती है जिसको लेकर सभी पार्टियां हल्द्वानी में अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है | लेकिन हल्द्वानी सीट में इस बार समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं | इस बार आम आदमी पार्टी लगातार लोगों के संपर्क और केजरीवाल के किए गए वादों को लेकर जनता के बीच जा रही है | वहीं सुमित हृदयेश भी अपनी मां के बल पर चुनाव जीतने का दावा कर रहे हैं |

अब देखना ये होगा कि क्या एक बार फिर कांग्रेस हल्द्वानी में अपना परचम लहराने में कामयाब होती है या फिर विपक्षी दल कांग्रेस के 3 बार विधायक बनने के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए हल्द्वानी सीट को अपने नाम करेगा | इस सवाल का जवाब आपको चुनावों के परिणाम आने के बाद यानि की 10 मार्च को ही पता चल पायेगा ही पता चल पायेगा कि आखिर हल्द्वानी सीट किस पार्टी की झोली में जाती है |


