
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


भगवान कृष्ण और राधा की पोशाकों, मुकुट और श्रृंगार के सामान की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच बाजार में एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जहां वह पूरे उत्साह के साथ राधा-कृष्ण की पोशाकें और श्रृंगार का सामान बेच रहा है।


दुकानदार का कहना है कि वह लंबे समय से जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण और राधा की पोशाकें बेचता आ रहा है। उसके लिए यह काम केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था और त्योहार से जुड़ने का माध्यम भी है।



जन्माष्टमी को लेकर बाजार में जगह-जगह राधा-कृष्ण की आकर्षक पोशाकें, रंग-बिरंगे मुकुट, बांसुरी और श्रृंगार का सामान सजाया गया है। श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार पोशाक और अन्य सामग्री खरीदने बाजार पहुंच रहे हैं। बच्चों के लिए विशेष रूप से आकर्षक पोशाकों की मांग बनी हुई है।



मुस्लिम समाज से आने वाले दुकानदार का कहना है कि त्योहार किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होते। उनका मानना है कि हर त्योहार लोगों के बीच खुशियां बांटने और आपसी भाईचारा मजबूत करने का अवसर देता है।


दुकानदार ने कहा कि राधा-कृष्ण की पोशाकें बेचने में उन्हें खुशी मिलती है। उनके अनुसार जब ग्राहक उनकी दुकान से सामान खरीदकर खुशी-खुशी लौटते हैं तो उन्हें भी संतोष होता है। वह कई वर्षों से इसी तरह जन्माष्टमी के मौके पर ग्राहकों की जरूरत के अनुसार सामान उपलब्ध कराते आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश की खूबसूरती आपसी प्रेम और भाईचारे में है। अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर खुशियां साझा करें तो समाज में सौहार्द और मजबूत होगा। उनके लिए सभी त्योहार खुशी और भाईचारे का संदेश लेकर आते हैं।



जन्माष्टमी के मौके पर राधा-कृष्ण की पोशाकें बेचता यह दुकानदार धार्मिक सौहार्द की खूबसूरत मिसाल पेश कर रहा है। उसकी दुकान से खरीदारी करने वाले ग्राहक जहां अपनी आस्था से जुड़ी तैयारियां पूरी कर


दुकानदार की इस पहल की बाजार में भी चर्चा हो रही है। ग्राहकों का कहना है कि त्योहारों के माध्यम से आपसी मेलजोल और सद्भाव का संदेश देने वाली ऐसी तस्वीरें समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण पेश करती हैं।

