
स्थान : मसूरी (देहरादून)
ब्यूरो रिपोर्ट


मसूरी-देहरादून मार्ग पर गलोगीधार में गुरुवार सुबह रोडवेज बस के सड़क पर पलट जाने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। बस के सड़क पर ही पड़े रहने के कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को करीब दो घंटे तक जाम की समस्या से जूझना पड़ा।


बस को सड़क से हटाने के लिए मौके पर क्रेन बुलाई गई। क्रेन की मदद से बस को हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बाद भी बस को तत्काल सड़क से हटाने में सफलता नहीं मिल सकी। इस दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित रही।



आखिरकार पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने मोर्चा संभाला और क्रेन की मदद से बस को सीधा कर सड़क के किनारे किया। बस हटने के बाद मार्ग पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ और दोनों ओर फंसे वाहनों को आगे बढ़ने का रास्ता मिला।



घटना के कारण परेशान रहे लोगों ने सड़क पर बाधा आने के बाद उसे हटाने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि मसूरी-देहरादून मार्ग पर मानसून के दौरान दुर्घटनाओं और भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में सड़क बाधित होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई जरूरी है।


बस को दुर्घटना के बाद समय रहते सड़क किनारे नहीं किया जा सका, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित होने के कारण देहरादून और मसूरी की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम में पर्यटक वाहन भी फंसे रहे।

स्थानीय लोगों ने कहा कि मानसून के दौरान यह मार्ग पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। किसी दुर्घटना या भूस्खलन के बाद यदि सड़क से बाधा हटाने में घंटों लग जाएं तो इससे यातायात के साथ-साथ आपात स्थिति में लोगों की परेशानी भी बढ़ सकती है।



स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मसूरी मार्ग पर दुर्घटना या भूस्खलन की स्थिति में तत्काल राहत और सड़क खोलने के लिए पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि त्वरित कार्रवाई से न केवल जाम की समस्या से बचा जा सकता है, बल्कि मानसून के दौरान इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात को भी सुचारू रखा जा सकता है।


लोगों ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन की ओर से मानसून को लेकर तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सड़क पर पलटी एक बस को हटाने में घंटों लगना व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है।

