ई-भूलेख से डाउनलोड खतौनी होगी मान्य, अधिकारियों को डीएम के सख्त निर्देश

ई-भूलेख से डाउनलोड खतौनी होगी मान्य, अधिकारियों को डीएम के सख्त निर्देश

स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : संजय जोशी

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जनहित में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए जनपद के सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों, उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड सरकार के अधिकृत ई-भूलेख पोर्टल से आम नागरिकों द्वारा स्वयं डाउनलोड की गई कम्प्यूटरीकृत खतौनी को स्वीकार किया जाए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य में भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण की व्यवस्था पहले से लागू है और सभी तहसीलों से कम्प्यूटरीकृत खतौनी की प्रतियां जारी की जा रही हैं। नागरिक निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा कर ई-भूलेख पोर्टल के माध्यम से अपनी खतौनी प्राप्त और डाउनलोड कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि संज्ञान में आया है कि कुछ विभागीय कार्यालयों में ई-भूलेख पोर्टल से स्वयं डाउनलोड की गई खतौनी को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। ऐसे मामलों में लोगों को दोबारा तहसील कार्यालय जाकर उसी खतौनी की प्रति लेने के लिए कहा जा रहा है, जिससे आम जनता को अनावश्यक परेशानी और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है।

डीएम ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि यदि ऑनलाइन प्राप्त खतौनी का विवरण ई-भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेख से मिलान योग्य है, तो केवल इस आधार पर उसे अस्वीकार नहीं किया जाए कि उसे संबंधित व्यक्ति ने स्वयं ऑनलाइन डाउनलोड किया है।

उन्होंने कहा कि किसी विभाग में भूमि संबंधी खतौनी प्रस्तुत करने की आवश्यकता होने पर संबंधित व्यक्ति को उसी दस्तावेज की प्रति दोबारा तहसील कार्यालय से प्राप्त करने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। हालांकि, यदि किसी विशेष सेवा या प्रकरण में किसी अधिनियम, नियम, शासनादेश अथवा सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत प्रमाणित प्रति या मूल अभिलेख की आवश्यकता निर्धारित है, तो ऐसे मामलों में संबंधित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि ऑनलाइन प्राप्त खतौनी में यदि किसी प्रकार की अभिलेखीय विसंगति सामने आती है तो उसकी जांच की जाए। नाम, खाता संख्या, खसरा संख्या अथवा अन्य विवरण में संदेह या तथ्यात्मक अंतर पाए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालय भेजने के बजाय ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अभिलेख का सत्यापन किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभाग आपसी समन्वय के माध्यम से भी मामले का समाधान करें। इससे नागरिकों को एक ही दस्तावेज के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और सरकारी सेवाओं में डिजिटल व्यवस्था का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

डीएम ललित मोहन रयाल ने साफ किया कि ई-भूलेख पोर्टल से प्राप्त खतौनी को केवल इसलिए अमान्य नहीं माना जाएगा कि उसे संबंधित व्यक्ति ने स्वयं ऑनलाइन डाउनलोड किया है। पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेख से उसका विवरण सत्यापित होने पर उसे स्वीकार किया जाना चाहिए।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आम जनमानस को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालय से उसी दस्तावेज की दोबारा प्रति प्राप्त करने के लिए बाध्य नहीं किया जाए और डिजिटल भू-अभिलेख व्यवस्था का लाभ लोगों तक सरल एवं सुविधाजनक तरीके से पहुंचाया जाए।