स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


देहरादून और विकासनगर से उत्तरकाशी-पुरोला मार्ग पर संचालित होने वाली स्टेज कैरिज बसों की फिटनेस को लेकर परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने इस रूट पर चलने वाली बसों की तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया है।


आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने स्पष्ट किया कि 15 साल पुरानी बसों के संचालन पर रोक लगाने को लेकर शासन स्तर से फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष पुरानी बसों को हटाने की बात बस यूनियन की ओर से लिए गए निर्णय से जुड़ी है।


परिवहन विभाग ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए देहरादून और विकासनगर के एआरटीओ अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर देहरादून-उत्तरकाशी-पुरोला रूट पर संचालित करीब 32 बसों की तकनीकी फिटनेस जांच पूरी करने के लिए कहा गया है।


फिटनेस जांच के दौरान बसों की तकनीकी स्थिति और निर्धारित सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया जाएगा। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि पर्वतीय मार्गों पर यात्रियों को लेकर चलने वाली बसें संचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं या नहीं।

आरटीओ प्रशासन के अनुसार फिटनेस जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि संबंधित बसों को दुर्गम पर्वतीय मार्गों पर संचालन की अनुमति दी जाए या नहीं। मानकों पर खरी उतरने वाली बसों के संचालन में कोई परेशानी नहीं होगी, जबकि खामियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


परिवहन विभाग का यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पर्वतीय मार्गों पर यात्री वाहनों की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। दुर्गम रास्तों पर खराब हालत वाले वाहनों का संचालन यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।



विभाग ने केवल पर्वतीय रूट की बसों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। देहरादून शहर में संचालित होने वाली पुरानी सिटी बसों की भी तकनीकी जांच कराने की तैयारी है। इन बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक जांच में जो बसें निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, उन्हें तत्काल सड़कों से हटाया जाएगा। परिवहन विभाग का उद्देश्य नियमों का पालन कराने के साथ यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।

फिलहाल देहरादून और विकासनगर से उत्तरकाशी-पुरोला मार्ग पर चलने वाली करीब 32 बसों की फिटनेस जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इनमें से कितनी बसें पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षित संचालन के मानकों को पूरा करती हैं और किन वाहनों पर कार्रवाई की जरूरत पड़ती है।

