पिरान कलियर दरगाह में जलभराव के बाद प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण

पिरान कलियर दरगाह में जलभराव के बाद प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण

स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के बाद विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर स्थित हजरत साबिर पाक की दरगाह परिसर में गंदा पानी भरने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। जलभराव की समस्या को लेकर लोगों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। अब करीब चार दिन बाद तहसील प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

जॉइंट मजिस्ट्रेट के निर्देश पर नायब तहसीलदार मधुकर जैन के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम पिरान कलियर पहुंची और दरगाह क्षेत्र में नालों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुरू की। टीम ने जेसीबी और कर्मचारियों की मदद से बंद पड़े नालों के चैंबर खुलवाए और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम शुरू कराया।

प्रशासनिक टीम ने क्षेत्र के प्रमुख नालों का निरीक्षण किया और पाया कि कई स्थानों पर अतिक्रमण और गंदगी के कारण जल निकासी प्रभावित हो रही थी। इसके बाद नालों की सफाई और अवरोध हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

प्रशासन का कहना है कि दरगाह परिसर को जलभराव की समस्या से स्थायी रूप से निजात दिलाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। बारिश के दौरान पानी दरगाह परिसर में प्रवेश न करे, इसके लिए नालों की नियमित सफाई और निगरानी की जाएगी।

गौरतलब है कि बारिश के बाद दरगाह परिसर में जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने जल निकासी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी और जल्द समाधान की मांग की थी।

विरोध के बाद प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। नायब तहसीलदार मधुकर जैन ने बताया कि जॉइंट मजिस्ट्रेट के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है।

प्रशासन ने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए दरगाह क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। साथ ही नालों पर दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए लगातार निगरानी भी रखी जाएगी।

तहसील प्रशासन का दावा है कि इस अभियान के पूरा होने के बाद पिरान कलियर दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के पानी की निकासी बेहतर होगी और श्रद्धालुओं को जलभराव जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।