

ब्यूरो रिपोर्ट

हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सामरिक और समुद्री रणनीति को मजबूत करने की दिशा में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारत और इंडोनेशिया ने मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित इंडोनेशिया के रणनीतिक सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास पर सहमति बनाई है। यह बंदरगाह भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट के बेहद करीब स्थित है और इसे हिंद महासागर में भारत की समुद्री उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


भारत और इंडोनेशिया की यह साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की संवेदनशीलता पूरी दुनिया ने देखी। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ा था। इसी अनुभव के बाद भारत अब हिंद महासागर में ऐसे रणनीतिक ठिकानों को विकसित करने पर जोर दे रहा है, जो समुद्री व्यापार और सुरक्षा दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हों।


सबांग पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश बिंदु पर स्थित है, जहां से विश्व के लगभग एक-चौथाई समुद्री व्यापार का आवागमन होता है। पश्चिम एशिया से पूर्वी एशिया तक जाने वाले तेल, गैस, कंटेनर, कोयला और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। अनुमान है कि हर वर्ष करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का वैश्विक व्यापार इस मार्ग से संचालित होता है, जिससे इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत और बढ़ जाती है।

भारत के लिए मलक्का जलडमरूमध्य केवल व्यापारिक मार्ग नहीं बल्कि पूर्वी एशिया से जुड़ने वाली महत्वपूर्ण समुद्री जीवनरेखा है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और आसियान देशों के साथ भारत का बड़ा समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होता है। साथ ही भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” को गति देने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका मजबूत करने में भी यह समुद्री मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चीन के लिए भी मलक्का जलडमरूमध्य ऊर्जा सुरक्षा का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। चीन के आयातित कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से पहुंचता है। वर्ष 2003 में तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने “मलक्का दुविधा” का उल्लेख करते हुए स्वीकार किया था कि यदि किसी संघर्ष या संकट के दौरान यह मार्ग बाधित हुआ तो चीन की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग पोर्ट के विकास से भारत को अंडमान-निकोबार कमांड और ग्रेट निकोबार पोर्ट परियोजना के साथ एक मजबूत सामरिक नेटवर्क विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे हिंद महासागर में समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक सपोर्ट, मानवीय सहायता और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा एवं समुद्री सहयोग को भी नए स्तर पर ले जा सकती है।


सबांग पोर्ट का विकास केवल एक बंदरगाह परियोजना नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है, जबकि क्षेत्रीय समुद्री व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग को भी नई दिशा मिल सकती है।

