

स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

सिविल लाइंस स्थित गांधी वाटिका के बाहर दुकान कब्जे को लेकर सोमवार को हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। नगर निगम की टीम दुकान खाली कराने पहुंची तो दुकान संचालक और उसके परिजनों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।


मामला सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित नहर पटरी पर दुकान नंबर-2 का है, जहां “भूपेंद्र सर्विस सेंटर” के नाम से बाइक सर्विस सेंटर संचालित किया जा रहा है। नगर निगम की टीम राजस्व निरीक्षक गिरीश चंद सेमवाल के नेतृत्व में दुकान का कब्जा लेने पहुंची थी। कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।



नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि उक्त दुकान वर्ष 1994 में परमानंद के नाम आवंटित की गई थी। निगम के अनुसार वर्तमान में उनके भाई भूपेंद्र सिंह द्वारा दुकान पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि परमानंद की शिकायत के आधार पर दुकान खाली कराने की कार्रवाई की जा रही थी।


वहीं, दुकान संचालक भूपेंद्र सिंह और उनके पुत्र दीपक ने नगर निगम की कार्रवाई को गलत बताते हुए विरोध किया। उनका कहना है कि परमानंद ने वर्षों पहले शपथ पत्र और नोटिस के माध्यम से दुकान उन्हें सौंप दी थी, जिसके बाद से वह लगातार दुकान का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दुकान का बिजली कनेक्शन भी भूपेंद्र सिंह के नाम पर है।

दुकान संचालक पक्ष ने आरोप लगाया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और बिना किसी न्यायालयी आदेश के नगर निगम जबरन कब्जा लेने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने निगम कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।

मौके पर बढ़ते विरोध और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए नगर निगम की टीम बिना कब्जा लिए ही वापस लौट गई। हालांकि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।


फिलहाल दुकान विवाद को लेकर सभी की नजरें न्यायालय और नगर निगम की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

