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रिपोर्टर- पंकज सक्सेना

स्थान- नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपनी तरफ से तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने का ऐलान कर दिया | उसके बाद सबको यही लगा कि दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान किसान आन्दोलन से पीछे हट जायेंगे और अपने-अपने घरों की ओर वापस लौट जाएंगे लेकिन आज तीन दिन होने को आये हैं और अभी तक ऐसा होता नहीं दिख रहा है |

तीनों कृषि कानून रद्द करने के बाद किसान अब अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अड़ गए हैं | उन्होंने पीएम मोदी के लिए एक जारी संदेश किया और उन्हें अपनी मांगों से अवगत कराया |किसानों का कहना है कि जल्द से जल्द इन मुद्दों का सयुंक्त किसान मोर्चा के साथ वार्ता के इनका भी निपटारा किया जाये, ताकि जल्द से जल्द हम भी अपने घर लौट सकें |

.किसानों की 6 मांगों का विस्तार :

संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम मोदी को संदेश देते हुए अवगत कराया कि हमारी शुरु से ही तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा तीन और मांगें थीं, जिनमें से पहली, खेती की संपूर्ण लागत पर आधारित (C2+50%) न्यूनतम समर्थन मूल्य को सभी कृषि उपज के ऊपर, सभी किसानों का कानूनी हक बना दिया जाए, ताकि देश के हर किसान को अपनी पूरी फसल पर कम से कम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी हो सके | किसानों ने पीएम मोदी को याद दिलाया कि स्वयं उनकी अध्यक्षता में बनी समिति ने 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को यह सिफारिश दी थी और सरकार ने संसद में भी इसके बारे में घोषणा भी की थी.


साथ ही अगली दो मांगों को पीएम मोदी को याद दिलाते हुए कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित “विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020/2021” का ड्राफ्ट वापस लिया जाए. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार ने वादा किया था कि इसे वापस लिया जाएगा, लेकिन फिर से वादे के खिलाफ इसे संसद की कार्यसूची में शामिल किया गया था.
तीसरी मांग पर उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021” में किसानों को सजा देने के प्रावधान को हटाया जाए और साथ ही उन्होंने कहा कि इस साल सरकार ने कुछ किसान विरोधी प्रावधान तो हटा दिए, लेकिन सेक्शन 15 के माध्यम से फिर किसान को सजा की गुंजाइश बना दी गई है |
इसके अलावा उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में किसान आंदोलन के दौरान कुछ और भी मुद्दे उठे हैं, जिनका जल्द निपटारा करना अनिवार्य है | इनमें दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और अनेक राज्यों में हजारों किसानों को इस आंदोलन के दौरान (जून 2020 से अब तक) हुए केसों को तत्काल वापस लिया जाए | ‘लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधार और सेक्शन 120B के अभियुक्त अजय मिश्रा टेनी खुले घूम रहे हैं और आपके मंत्रिमंडल में मंत्री बने हुए हैं. वह आपके और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंच भी साझा कर रहे हैं. उन्हें बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए’ | और आखिरी मांग में किसानों ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान से लेकर अब तक लगभग 700 किसान शहीद हो चुके हैं | उनके परिवारों के मुआवजा और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाये और साथ ही शहीद किसानों की स्मृति के लिए सिंघु बॉर्डर पर जमीन दी जाए ताकि वहां उनकी याद में एक शहीद स्मारक बन सकें |


