बाजपुर शुगर मिल में स्क्रैप टेंडर पर विवाद, कॉपर को स्क्रैप में बेचने की तैयारी का आरोप

बाजपुर शुगर मिल में स्क्रैप टेंडर पर विवाद, कॉपर को स्क्रैप में बेचने की तैयारी का आरोप

स्थान : बाजपुर
रिपोर्टर
: विशेष शर्मा

उत्तराखंड के बाजपुर स्थित शुगर मिल एक बार फिर विवादों में आ गई है। इस बार मामला स्क्रैप टेंडर से जुड़ा है, जहां फैक्ट्री कर्मचारियों ने मिल प्रबंधन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि स्क्रैप बिक्री की आड़ में लाखों रुपये मूल्य के कॉपर को भी लोहे के स्क्रैप के साथ बेचने की तैयारी की जा रही है, जिससे पहले से घाटे में चल रही शुगर मिल को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कर्मचारियों का आरोप है कि स्क्रैप बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना है कि मूल्यवान कॉपर को सामान्य लोहे के स्क्रैप के साथ शामिल कर कम कीमत पर बेचने की कोशिश की जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह सरकारी संपत्ति के साथ-साथ मिल के हितों के लिए भी गंभीर नुकसानदायक साबित हो सकता है।

फैक्ट्री कर्मचारियों ने स्क्रैप उठान प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जा रहे तौल कांटे पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि तौल प्रक्रिया में भी गड़बड़ी की जा रही है, जिससे स्क्रैप की वास्तविक मात्रा और मूल्य को प्रभावित किया जा सकता है। कर्मचारियों ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि स्क्रैप व्यापारी और मिल प्रबंधन की कथित मिलीभगत के कारण पूरी प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फैक्ट्री कर्मचारियों ने मांग की है कि महंगे कॉपर को लोहे के स्क्रैप के मूल्य पर न बेचा जाए और स्क्रैप की बिक्री एवं उठान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराई जाए। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और मिल प्रबंधन दोनों की जिम्मेदारी है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद चीनी मिल की प्रभारी जीएम एवं एसडीएम डॉ. अमृता सगर्म ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निष्पक्षता के साथ मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

इस संबंध में हुई वार्ता के दौरान भाजपा नेता यशपाल राजहंस भी मौजूद रहे। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में कर्मचारियों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो शुगर मिल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।