

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सरकार

उधमसिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र स्थित बरी अंजनिया गांव में जमीन विवाद ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। खेत में मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों के बाद देर रात कथित फायरिंग की घटना सामने आने से पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।


घटना काली माता मंदिर के समीप स्थित कृषि भूमि की बताई जा रही है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, 3 जुलाई की शाम करीब 4:45 बजे दो कारों में सवार करीब 10 लोग खेत में पहुंचे और दिनेश जोशी के साथ मारपीट की। उनका आरोप है कि बीच-बचाव नहीं होता तो आरोपी गंभीर वारदात को अंजाम दे सकते थे। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने 17 मील चौकी में तहरीर देकर जान-माल की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।



पीड़ित चंद्रबदन जोशी का कहना है कि उनका परिवार पिछले लगभग 60 वर्षों से उक्त भूमि पर खेती करता आ रहा है। उनका आरोप है कि जमीन पर कब्जा करने की नीयत से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष उनकी खड़ी गन्ने की फसल भी रातोंरात जोत दी गई थी और अब दोबारा मारपीट की घटना सामने आई है। पीड़ित पक्ष ने इसे क्षेत्र में सक्रिय कथित भू-माफियाओं की गतिविधियों से जोड़ते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।


ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद आरोपियों के हौसले बुलंद रहे। उनके अनुसार, शुक्रवार रात करीब 8 बजे दो गाड़ियों में सवार कुछ लोग दोबारा गांव पहुंचे और कथित तौर पर तीन राउंड फायरिंग की। गोलियों की आवाज से गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, फायरिंग के इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
घटना की सूचना पर एसएसआई सी.के. आर्य और 17 मील चौकी प्रभारी राकेश राय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, ग्रामीणों के बयान दर्ज किए और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है तथा जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले पर विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने भी सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में लगातार इस प्रकार की घटनाएं होना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि यदि अशोक फार्म प्रकरण में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती, तो बरी अंजनिया जैसी घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि कानून का भय समाप्त होता दिखाई दे रहा है और इसकी जवाबदेही पुलिस-प्रशासन को तय करनी चाहिए। वहीं, पूरे मामले में पुलिस जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जा रहा है।



