उत्तराखंड में निषाद पार्टी की चुनावी सक्रियता बढ़ी, भाजपा से पांच सीटों की मांग

उत्तराखंड में निषाद पार्टी की चुनावी सक्रियता बढ़ी, भाजपा से पांच सीटों की मांग

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी ने राज्य में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश के बाद अब पार्टी उत्तराखंड में भी संगठन का विस्तार करने और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुट गई है। इस बीच पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है।

निषाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश चैतन्य यादव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनके नेतृत्व के पांच वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यकाल उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने दावा किया कि धामी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जो राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

गिरीश चैतन्य यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर निषाद पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में कार्य कर रही है और उत्तराखंड में भी उसी सहयोग की भावना के साथ भाजपा का समर्थन कर रही है। उनके अनुसार, दोनों दलों के बीच राजनीतिक समन्वय बना हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि निषाद पार्टी का उत्तराखंड की लगभग 20 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है और पार्टी इन क्षेत्रों में भाजपा को चुनावी मजबूती प्रदान कर सकती है। उनका कहना है कि पार्टी लंबे समय से इन क्षेत्रों में संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान चला रही है।

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए निषाद पार्टी ने भाजपा से गठबंधन के तहत पांच विधानसभा सीटों की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पार्टी को ये सीटें दी जाती हैं, तो निषाद पार्टी सभी सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा को लगातार तीसरी बार उत्तराखंड में सरकार बनाने में सहयोग करेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भाजपा गठबंधन के तहत निषाद पार्टी को टिकट नहीं देती है, तो पार्टी अपने प्रभाव वाले करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों में स्वयं चुनाव लड़ने के विकल्प पर भी विचार करेगी। उनके अनुसार, संगठन इन सभी सीटों पर पहले से सक्रिय होकर काम कर रहा है।

फिलहाल भाजपा की ओर से निषाद पार्टी की सीटों की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और गठबंधन को लेकर होने वाली चर्चाओं पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।