ब्यूरो रिपोर्ट


अमेरिका के दो अहम सहयोगी तुर्की और इजरायल पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों पर आमने-सामने दिखाई दिए हैं। गाजा युद्ध, सीरिया में बढ़ता प्रभाव, पूर्वी भूमध्य सागर में ऊर्जा संसाधनों को लेकर मतभेद और दोनों देशों की तीखी राजनीतिक बयानबाजी ने रिश्तों में तनाव बढ़ाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य संघर्ष होता है तो किसकी स्थिति मजबूत होगी।


ग्लोबल फायरपावर 2026 के आंकड़ों के अनुसार सैन्य ताकत के मामले में तुर्की दुनिया में 9वें और इजरायल 15वें स्थान पर है। तुर्की का पावर इंडेक्स 0.1975 जबकि इजरायल का 0.2707 बताया गया है। इस सूचकांक में जनशक्ति, हथियार, रक्षा बजट, भूगोल और सैन्य संसाधनों समेत कई कारकों को शामिल किया जाता है। इस लिहाज से कुल सैन्य क्षमता में तुर्की आगे दिखाई देता है।



तुर्की की सबसे बड़ी ताकत उसकी बड़ी सैन्य और जनसंख्या क्षमता है। उसकी सक्रिय सैन्य शक्ति करीब 3.55 लाख से 4.81 लाख के बीच बताई जाती है, जबकि रिजर्व बलों की संख्या लगभग 3.78 लाख है। इसके अलावा देश के पास बड़ी पैरामिलिट्री क्षमता भी है। करीब 8.5 करोड़ की आबादी लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में तुर्की को बड़ी मानव संसाधन क्षमता प्रदान करती है।

वहीं इजरायल की सक्रिय सेना की संख्या करीब 1.70 लाख बताई जाती है, लेकिन उसका रिजर्व सिस्टम बेहद मजबूत है। लगभग 4.65 लाख रिजर्विस्ट जरूरत पड़ने पर तेजी से सैन्य सेवा में बुलाए जा सकते हैं। इजरायल में अनिवार्य सैन्य सेवा के कारण समाज का बड़ा हिस्सा सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ा रहता है। इससे युद्ध की स्थिति में सेना की तेजी से लामबंदी संभव हो जाती है।


जमीनी युद्ध की बात करें तो यहां तुर्की को संख्या के लिहाज से स्पष्ट बढ़त हासिल है। उसके पास करीब 2,200 से 2,284 मुख्य युद्धक टैंक बताए जाते हैं। इनमें लेपर्ड-2ए4, आधुनिकीकृत एम60 और स्वदेशी अल्ताय टैंक शामिल हैं। इसके अलावा तुर्की के पास बड़ी संख्या में आर्टिलरी, इन्फेंट्री फाइटिंग व्हीकल और बख्तरबंद वाहन भी हैं।

इजरायल के पास संख्या में कम लेकिन अत्याधुनिक जमीनी हथियार हैं। उसके मर्कावा एमके-4 टैंक अपनी सुरक्षा और तकनीकी क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इनमें ट्रॉफी एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो एंटी-टैंक मिसाइल और रॉकेट जैसे खतरों से सुरक्षा में मदद करती है। शहरी युद्ध और सटीक सैन्य अभियानों में इजरायल का अनुभव उसकी बड़ी ताकत माना जाता है।



हवाई ताकत में मुकाबला और दिलचस्प हो जाता है। तुर्की के पास एक हजार से ज्यादा सैन्य विमान बताए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में एफ-16 लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसके अलावा तुर्की ने ड्रोन तकनीक में भी उल्लेखनीय क्षमता विकसित की है। दूसरी ओर, इजरायल अपनी आधुनिक वायुसेना, उन्नत लड़ाकू विमानों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, खुफिया तंत्र और सटीक हमलों के लिए जाना जाता है। हवा में तकनीकी गुणवत्ता के मामले में इजरायल को बढ़त मिल सकती है।
कुल मिलाकर अगर तुर्की और इजरायल के बीच सीधा संघर्ष होता है तो किसी एक देश को निश्चित विजेता बताना आसान नहीं होगा। लंबे और व्यापक जमीनी युद्ध में तुर्की की बड़ी सेना, अधिक जनसंख्या और सैन्य संसाधन उसे फायदा दे सकते हैं, जबकि सीमित अवधि के उच्च तकनीकी संघर्ष में इजरायल की वायु शक्ति, खुफिया क्षमता, मिसाइल रक्षा और युद्ध अनुभव निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा दोनों देशों के अमेरिका और नाटो से अलग-अलग प्रकार के संबंध होने के कारण ऐसा संघर्ष केवल दो देशों की सैन्य क्षमता का मामला नहीं रहेगा, बल्कि इसका व्यापक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी पड़ सकता है।


