

स्थान : थराली
ब्यूरो रिपोर्ट

चमोली जिले के थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में सीएचसी थराली से कर्णप्रयाग रेफर की गई गर्भवती महिला सरिता देवी की रास्ते में एम्बुलेंस में मौत हो जाने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस दुखद घटना में गर्भवती महिला और उसके शिशु दोनों की जान चली गई थी।


घटना के बाद पहले कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। अब थराली प्रधान संगठन भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गया है और सरकार से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।



प्रधान संगठन के बैनर तले क्षेत्र के ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली परिसर में सांकेतिक धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव बना हुआ है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।


धरना समाप्त होने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने तहसील पहुंचकर उपजिलाधिकारी यशवीर रावत को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सीएचसी थराली में अल्ट्रासाउंड मशीन, हार्ट मॉनिटर, ईसीजी जैसी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग की गई।

प्रधान संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र रावत ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लगातार मांगों के बावजूद यदि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो क्षेत्रवासियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

प्रधान संगठन ने प्रशासन और सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। संगठन ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।


साथ ही प्रधान संगठन ने आगामी विधानसभा चुनावों के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है। हालांकि प्रशासन की ओर से ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित मांगों को उच्च स्तर पर भेजने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।

