

स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट

भारत-चीन सीमा से सटे उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में इन दिनों बॉर्डर टूरिज्म और वाइब्रेंट टूरिज्म की नई लहर देखने को मिल रही है सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यहां के आध्यात्मिक एवं साहसिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।


देवताल, पार्वती कुंड, नीती पास और लपथल वैली जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र अब देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं समुद्र तल से लगभग 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल अपनी प्राकृतिक झील और बर्फ से ढकी पहाड़ियों के लिए खास पहचान बना रहा है, वहीं पार्वती कुंड धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं और ट्रैकर्स की पहली पसंद बनता जा रहा है लपथल वैली और रिमखिम घाटी को भी अब ‘ग्रेट कैन्यन ऑफ इंडिया’ के रूप में जाना जाने लगा है।



प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रों में इनर लाइन परमिट (ILP) व्यवस्था को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सरल बनाए जाने के बाद पर्यटकों को अब लंबी प्रक्रियाओं और कागजी जटिलताओं से राहत मिली है, जिससे सीमा क्षेत्र तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।


हाल ही में मलारी गांव में आयोजित ‘नीती अल्ट्रा मैराथन’ और माना पास चैलेंज इवेंट को इस क्षेत्र के पर्यटन विकास में बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है इन आयोजनों के बाद अब तक रिकॉर्ड 1,674 पर्यटक सीमा दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं, जबकि केवल देवताल और पार्वती कुंड में ही 283 से अधिक पर्यटक दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।

उप-जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि प्रक्रिया के सरलीकरण और सफल आयोजनों के कारण पर्यटकों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है उन्होंने कहा कि सितंबर माह में अनुकूल मौसम को देखते हुए आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।


सीमांत पर्यटन के इस विस्तार से जहां देशवासियों को अपनी सीमाओं को नजदीक से देखने का अवसर मिल रहा है, वहीं स्थानीय होमस्टे संचालकों, गाइडों और छोटे व्यापारियों की आय में भी वृद्धि हो रही है इससे क्षेत्र की आर्थिकी को नई मजबूती मिल रही है और सीमांत इलाकों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।



