37 वर्षों की साधना से तैयार महामृत्युंजय यंत्र की मैय्यड़ में स्थायी स्थापना

37 वर्षों की साधना से तैयार महामृत्युंजय यंत्र की मैय्यड़ में स्थायी स्थापना

लोकेशन:- रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

तपस्या, साधना और आस्था के संगम के रूप में हिसार के मैय्यड़ स्थित ओम सिद्ध महामृत्युंजय अंतरराष्ट्रीय योग एवं ज्योतिष अनुसंधान केंद्र में विश्व के सबसे बड़े महामृत्युंजय यंत्र की स्थायी स्थापना की गई है। 37 वर्षों की साधना के बाद तैयार किए गए इस यंत्र का दिव्य द्वार नागपंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।

इस अवसर पर यंत्र पर पांच करोड़ बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महाअनुष्ठान आयोजित किया गया। आयोजकों का दावा है कि इस महाअनुष्ठान के माध्यम से भारत के कालसर्प दोष निवारण का आध्यात्मिक संकल्प लिया गया है। इससे पहले महामृत्युंजय यंत्र को प्रयागराज में अस्थायी रूप से स्थापित किया गया था, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसके दर्शन किए थे। अब इसे मैय्यड़ में स्थायी रूप से स्थापित किया गया है।

37 वर्षों की साधना का साकार स्वरूप

अनुसंधान केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता में स्वामी सहजानंद महाराज ने बताया कि महामृत्युंजय यंत्र उनकी 37 वर्षों की अखंड साधना का साकार स्वरूप है। उन्होंने कहा कि केंद्र का उद्देश्य केवल यंत्र के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं को ध्यान, मेडिटेशन, पूजा-पाठ, महामृत्युंजय साधना और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर उपलब्ध कराना भी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा, योग, ज्योतिष और आध्यात्मिक विज्ञान को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। भविष्य में इस केंद्र को आध्यात्मिक चेतना और आत्मकल्याण के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

पांच करोड़ बेलपत्र अर्पित करने का अनुष्ठान

नागपंचमी के अवसर पर महामृत्युंजय यंत्र के लोकार्पण के साथ पांच करोड़ बेलपत्र अर्पित करने का विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ व्यापक आध्यात्मिक संकल्प के रूप में किया जा रहा है।

आयोजकों का दावा है कि पांच करोड़ बेलपत्रों का यह महाअर्पण भारत देश के कालसर्प दोष के निवारण के संकल्प के साथ किया जा रहा है। आयोजन को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया।

33 अक्षरों में महामृत्युंजय मंत्र का आध्यात्मिक रहस्य

प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी सहजानंद महाराज और एस्ट्रो प्रद्युमन ने महामृत्युंजय मंत्र के 33 अक्षरों के आध्यात्मिक एवं सांकेतिक महत्व की जानकारी दी। उनके अनुसार, मंत्र के प्रत्येक अक्षर को मानव शरीर के ऊर्जा केंद्र और चेतना के विशेष आयाम से जोड़कर देखा जाता है।

इस दौरान विभिन्न पोस्टरों और प्रस्तुतियों के माध्यम से महामृत्युंजय मंत्र, यंत्र, ध्यान, सूक्ष्म शरीर, मंत्र विज्ञान और ऊर्जा प्रवाह जैसे विषयों को भी समझाया गया।

ध्यान और आध्यात्मिक शोध का बनेगा केंद्र

अनुसंधान केंद्र में श्रद्धालुओं के लिए ध्यान, मेडिटेशन, महामृत्युंजय साधना और पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाएगी। स्वामी सहजानंद महाराज के अनुसार, केंद्र का उद्देश्य लोगों को तनावमुक्त, संतुलित और आध्यात्मिक जीवन की दिशा में प्रेरित करना है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में मैय्यड़ स्थित यह केंद्र राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आध्यात्मिक शोध और साधना का प्रमुख केंद्र बनेगा। आयोजकों के अनुसार, केंद्र में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ योग, ज्योतिष और ध्यान से जुड़े अध्ययन एवं शोध को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

नागपंचमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। 37 वर्षों की साधना के बाद महामृत्युंजय यंत्र की स्थायी स्थापना को आयोजकों ने आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।