निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर प्रशासन सख्त, अतिरिक्त शुल्क जुलाई से होगा समायोजित

निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर प्रशासन सख्त, अतिरिक्त शुल्क जुलाई से होगा समायोजित

रिपोर्टर : संजय जोशी
स्थान : नैनीताल

निजी विद्यालयों द्वारा विभिन्न मदों में अनधिकृत शुल्क वसूली और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने जिले के सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण एवं वसूली संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन के इस फैसले से हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

जारी आदेश के अनुसार अब निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क अथवा अन्य किसी भी मद में मनमाने तरीके से शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक एवं औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जाएगा। शिक्षण एवं परीक्षा शुल्क के अलावा अन्य सभी शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में निर्धारित किया जाएगा, जिसे न्यूनतम रखा जाएगा और इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) की स्वीकृति अनिवार्य होगी।

शासन के निर्देशों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकेंगे। इसके लिए भी पीटीए की मंजूरी आवश्यक होगी। मनमानी शुल्क वृद्धि को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

विद्यालयों को पूरे शैक्षणिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही कराई जा सकेंगी। परीक्षा शुल्क वास्तविक लागत के आधार पर तय होगा तथा किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए यह 600 रुपये से अधिक नहीं होगा। वहीं स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) शुल्क मात्र एक रुपये निर्धारित किया गया है।

अभिभावकों की सुविधा के लिए विद्यालयों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही अथवा वार्षिक शुल्क भुगतान का विकल्प देना होगा। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा तथा शुल्क की रसीद देना अनिवार्य होगा।

प्रशासन ने आदेश दिया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूले गए अतिरिक्त शुल्क का समायोजन 1 जुलाई 2026 से शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त राशि अधिक होगी तो उसे आगामी महीनों की फीस में समायोजित करना होगा। सभी विद्यालयों को सात दिनों के भीतर समायोजन का प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर आरटीई अधिनियम के तहत एक लाख रुपये तथा सीबीएसई उपविधियों के तहत पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा विद्यालय की मान्यता और एनओसी निरस्त करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।

प्रशासन की इस पहल को निजी विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।