ज्यूरिख वार्ता में ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद, 6 अरब डॉलर और परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा तेज

ज्यूरिख वार्ता में ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद, 6 अरब डॉलर और परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा तेज

ब्यूरो रिपोर्ट

पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर में अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता जारी है। इस महत्वपूर्ण बातचीत में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ कई अन्य देशों के नेता भी शामिल हो रहे हैं। वार्ता को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ हुए प्रारंभिक समझौते की शर्तें ईरान के हित में हैं। उन्होंने कहा कि कतर में फ्रीज किए गए लगभग 6 अरब डॉलर की राशि ईरान को वापस किए जाने पर सहमति बनी है, जो समझौते की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका की प्रमुख चिंता ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर थी। उनके अनुसार ईरान ने स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि वह परमाणु बम विकसित नहीं करना चाहता और इस संबंध में आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित रहेगा।

ज्यूरिख में चल रही वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance, ईरानी संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif सहित कई शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं। कतर के प्रतिनिधियों की भी वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है।

ईरानी राष्ट्रपति ने इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शांति प्रक्रिया से सबसे अधिक असहज इजरायल है। उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता स्थापित होने से टकराव की राजनीति को झटका लगेगा।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता हुआ बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई है और समझौते के परिणाम जल्द सामने आ सकते हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति के विशेष दूत और वरिष्ठ सलाहकार भी शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए थे। इसी के तहत 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू की गई है। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान मध्यस्थ और गारंटर की भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्षों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो सकता है। साथ ही पश्चिम एशिया में शांति बहाली, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को भी मजबूती मिल सकती है। दुनिया की निगाहें अब ज्यूरिख वार्ता के अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।