रासायनिक खाद की सीमित बिक्री से किसान परेशान, यूरिया-डीएपी की कमी पर नाराजगी

रासायनिक खाद की सीमित बिक्री से किसान परेशान, यूरिया-डीएपी की कमी पर नाराजगी

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

डोईवाला शासन और प्रशासन द्वारा रासायनिक खाद की खरीद पर सीमा तय किए जाने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। खासतौर पर गन्ना और धान की खेती करने वाले काश्तकारों का कहना है कि निर्धारित मात्रा में मिलने वाली खाद उनकी फसलों के लिए पर्याप्त नहीं है।

इन दिनों गन्ने की फसल में यूरिया खाद की अधिक आवश्यकता है, वहीं आने वाले समय में धान की बुआई के बाद धान की फसल को भी यूरिया की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में खाद की सीमित उपलब्धता किसानों की चिंता बढ़ा रही है।

कृषि विभाग के निर्देशों के अनुसार किसानों को प्रति हेक्टेयर केवल 7 बैग यूरिया और 3 बैग डीएपी या एनपीके खाद ही दी जा रही है। किसानों का कहना है कि इतनी कम मात्रा में खाद मिलने से खेती और फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

डोईवाला ब्लॉक में बड़े स्तर पर गन्ने की खेती की जाती है। इस समय गन्ने की फसल को पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है, लेकिन खाद की कमी के कारण किसान परेशान हैं।

स्थानीय किसान चतर सिंह और उम्मेद बोरा ने बताया कि सब्सिडी वाली खाद लेने के लिए भी किसानों को लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। कई घंटों की प्रतीक्षा के बाद भी जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है।

किसानों का कहना है कि 7 बैग यूरिया और 3 बैग डीएपी की सीमा खेती की जरूरतों के हिसाब से बेहद कम है। इससे फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह नियम खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए बनाए होंगे, लेकिन वास्तविक किसान इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का मानना है कि कालाबाजारी बड़े स्तर पर होती है, जबकि छोटे किसान केवल अपनी फसल बचाने के लिए खाद खरीदते हैं।

किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि खेती की आवश्यकता को देखते हुए खाद की सीमा बढ़ाई जाए और पर्याप्त मात्रा में यूरिया एवं डीएपी उपलब्ध कराया जाए।

किसानों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिली तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।